राजस्थान में यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कुल 22 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, जिनकी अब जांच और छंटनी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद मेंबरशिप अभियान करीब एक महीने तक चलेगा, जिसके आधार पर अंतिम परिणाम तय होगा। बताया जा रहा है कि 15 अप्रैल के बाद सदस्यता अभियान शुरू हो सकता है। इस चुनाव को कांग्रेस के भीतर युवा नेतृत्व की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है, इसलिए हर गुट अपनी पूरी ताकत झोंकता नजर आ रहा है।

अभिषेक चौधरी और अनिल चोपड़ा के बीच सीधा मुकाबला
फिलहाल इस चुनाव में मुख्य मुकाबला दो नामों के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। Abhishek Chaudhary और Anil Chopra के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों नेता पहले भी 2014 के विश्वविद्यालय चुनाव में आमने-सामने आ चुके हैं, जहां अनिल चोपड़ा ने जीत हासिल की थी। इस बार अभिषेक चौधरी उस हार का बदला लेने के इरादे से मैदान में हैं, जबकि अनिल चोपड़ा अपनी जीत की लय को बरकरार रखना चाहते हैं। ऐसे में यह मुकाबला राजनीतिक रूप से बेहद रोमांचक बन गया है।
गुटबाजी और समर्थन का गणित
इस चुनाव में गुटबाजी भी साफ तौर पर नजर आ रही है। अनिल चोपड़ा को Sachin Pilot गुट का समर्थन माना जा रहा है, जबकि अभिषेक चौधरी को Ashok Gehlot और Govind Singh Dotasra के खेमे का करीबी बताया जा रहा है। वहीं, Mukul Kheechad को नामांकन से पीछे हटने के लिए समझाया गया, लेकिन उनका समर्थन किसे मिलेगा यह अब भी बड़ा सवाल बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक मुकुल को Mukesh Bhakar का समर्थन था, जिससे समीकरण और जटिल हो गए हैं।
चुनाव प्रक्रिया और आगे की रणनीति
यूथ कांग्रेस के ये चुनाव पार्टी के आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसमें आधिकारिक तौर पर बड़े नेता खुलकर किसी के समर्थन में प्रचार नहीं करते। इसके बावजूद पर्दे के पीछे गुटबाजी और रणनीति का खेल चलता रहता है। सदस्यता अभियान के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि किस उम्मीदवार को जमीनी स्तर पर ज्यादा समर्थन मिला है। फिलहाल दोनों प्रमुख उम्मीदवार अपनी अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं और युवा कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह चुनाव राजस्थान की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।








