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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बड़ी सराहना: टाटा अस्पताल और अफकॉन्स कंपनी की मदद से 94 मासूम बच्चों को मिला नया जीवन

On: Saturday, June 13, 2026 9:50 AM
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कंपनी ने मुनाफे का पैसा समाज सेवा में लगाया, कैंसर पीड़ित बच्चों के मुफ्त इलाज के लिए दिए 50 लाख रुपये

मुख्यमंत्री बोले- “गरीब परिवारों के लिए यह मदद किसी वरदान से कम नहीं”

मुंबई:
देश की जानी-मानी कंपनी ‘अफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए एक ऐसा नेक काम किया है, जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। कंपनी ने टाटा मेमोरियल अस्पताल के साथ मिलकर उन गरीब बच्चों की मदद की है, जो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं। इस सामाजिक कार्य की सराहना करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कंपनी की इस मदद से 94 मासूम बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में फिर से खुशियाँ और नई उम्मीद लौट आई है।
दरअसल, कंपनियों को अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा समाज सेवा और भलाई के कामों में लगाना होता है। इसी के तहत अफकॉन्स कंपनी ने साल 2025-26 में पढ़ाई-लिखाई और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ गरीबों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम उठाया।

क्या है पूरी योजना और कैसे मिली मदद?

अक्सर देखा जाता है कि पैसों की तंगी के कारण गरीब परिवार अपने बच्चों की बीमारी की समय पर जांच नहीं करा पाते। कैंसर जैसी बीमारी में अगर शुरुआत में ही पता न चले, तो बच्चे की जान को खतरा हो जाता है।
इसी समस्या को दूर करने के लिए अफकॉन्स कंपनी ने मुंबई के प्रसिद्ध टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल को 50 लाख रुपये की नकद आर्थिक मदद दी। इस पैसे का इस्तेमाल उन बच्चों की तुरंत और मुफ्त जांच करने के लिए किया गया, जिनमें कैंसर के लक्षण दिखाई दे रहे थे। कंपनी की इस मदद के कारण देश भर के 94 गरीब बच्चों की समय पर बड़ी-बड़ी जांचें हो सकीं और उनका इलाज तुरंत शुरू हो पाया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने क्या कहा?

इस सराहनीय कार्य पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा:

“कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में सबसे जरूरी होता है कि बीमारी का समय पर पता चल जाए। लेकिन गरीबी और पैसों की कमी के कारण कई माता-पिता अपने बच्चों की जरूरी जांचें भी नहीं करवा पाते। ऐसे मुश्किल समय में अफकॉन्स कंपनी द्वारा दी गई यह 50 लाख रुपये की मदद सिर्फ पैसा नहीं है, बल्कि तड़पते हुए मासूम बच्चों को नया जीवन देने और उनके लाचार माता-पिता को सहारा देने वाला एक पवित्र कार्य है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अगर सरकार के साथ-साथ देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी इसी तरह आगे आकर जिम्मेदारी संभालें, तो गरीबों को अच्छी शिक्षा और इलाज बहुत आसानी से मिल सकता है। उन्होंने इस पहल को देश के बाकी उद्योगों के लिए भी एक महान प्रेरणा बताया।

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