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नाबालिग दुष्कर्म मामले में उम्रकैद बरकरार आसाराम की कानूनी लड़ाई जारी

By Neha
On: Friday, May 29, 2026 1:28 PM
नाबालिग दुष्कर्म मामले में उम्रकैद बरकरार आसाराम की कानूनी लड़ाई जारी
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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जोधपुर पीठ ने उनकी अंतरिम जमानत रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद गुरुवार शाम को आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद पूरे मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी रिहाई की सभी संभावनाएं फिलहाल खत्म हो गई हैं और उन्हें जेल में ही अपनी सजा पूरी करनी होगी। यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा था और अब हाईकोर्ट के निर्णय ने एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है।

आस्था और भरोसे के टूटने पर अदालत की कड़ी टिप्पणी

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने अपने फैसले में बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को पीड़िता ने कभी भगवान के समान माना था, उसी ने उसकी आस्था और भरोसे को तोड़ा। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की हरकतें न केवल कानून का उल्लंघन हैं बल्कि मानवीय मूल्यों पर भी गहरा आघात हैं। अदालत ने माना कि इस घटना ने पीड़िता की गरिमा, स्वतंत्रता और मासूमियत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा समाज में एक मजबूत संदेश देती है कि किसी भी तरह का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समर्थकों की भीड़ और मेडिकल प्रक्रिया के बाद जेल वापसी

हाईकोर्ट के फैसले और आसाराम के जोधपुर पहुंचने की खबर के बाद एयरपोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक जमा हो गए। भीड़ के बीच आसाराम कार में बैठकर अपने समर्थकों का अभिवादन करते हुए पाल स्थित आश्रम पहुंचे। वहां कुछ समय रुकने के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए एम्स जोधपुर ले जाया गया, जहां औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद शाम को उन्होंने जोधपुर सेंट्रल जेल में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया। यह पूरा घटनाक्रम मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच लगातार चर्चा का विषय बना रहा।

2018 के दोषसिद्धि से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की राह

यह पूरा मामला 2013 में शुरू हुआ था जब एक नाबालिग पीड़िता जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम पहुंची थी और वहीं उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। बाद में 2018 में ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को इस मामले में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालिया फैसले में हाईकोर्ट ने उन्हें सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद उनके वकीलों ने संकेत दिया है कि वे इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं। अब आगे यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है, क्योंकि यह केस पहले ही देशभर में काफी संवेदनशील और चर्चित रहा है।

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