विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट | नई दिल्ली | 8 मार्च 2026: आज, 8 मार्च 2026 को देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर जो मंजर दिखा, वह स्वतंत्र भारत के इतिहास में सवर्ण समाज के एक नए और आक्रामक उदय की तस्दीक करता है। क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज सिंह शेखावत के आह्वान पर ‘दिल्ली कूच’ का नारा केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था के विरुद्ध एक ‘वैचारिक सर्जिकल स्ट्राइक’ बनकर उभरा है।

सत्ता का चक्रव्यूह: दमनकारी ‘हाउस अरेस्ट’ और अभेद्य किलेबंदी
विश्वस्त सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस आंदोलन की धमक से घबराए प्रशासन ने रात से ही ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ शुरू कर दिया था। राज सिंह शेखावत के सबसे विश्वसनीय सिपहसालारों, जिनमें उत्तर प्रदेश के नितिन सिंह शेखावत और राजस्थान के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं, उन्हें उनके आवासों पर ‘नजरबंद’ (House Arrest) कर दिया गया।
पुलिस की इस ‘अघोषित इमरजेंसी’ ने सवर्ण समाज के युवाओं में आक्रोश की ज्वाला को और भड़का दिया है। गुरुग्राम और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती के बावजूद, सवर्णों का हुजूम दिल्ली की सीमाओं को लांघने के लिए बेताब दिखा।
‘महा-संगठन’ की शक्ति: 40 संगठनों का अभेद्य किला
इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापकता है। राज सिंह शेखावत केवल एक सेना के सेनापति नहीं, बल्कि 40 से अधिक सवर्ण संगठनों के ‘संयुक्त मोर्चे’ के ध्वजवाहक बनकर उभरे हैं। इन संगठनों की एकजुटता ने इसे जन-आंदोलन बना दिया है।
प्रमुख सहयोगी संगठनों की सूची:
- क्षत्रिय करणी सेना (प्रमुख आयोजक)
- अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा
- अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ
- त्यागी भूमिहार समाज मोर्चा
- अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (हरिवंश गुट)
- श्री राजपूत करणी सेना
- सवर्ण चेतना मंच
- अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
- भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच
- सवर्ण समाज कल्याण संघ
- क्षत्रिय युवा महासभा
- राजपूत उत्थान सभा
- ब्राह्मण युवा शक्ति संघ
- सवर्ण जन कल्याण समिति
- वैश्य-क्षत्रिय एकता परिषद (तथा 25 अन्य क्षेत्रीय और जातिगत समन्वय संगठन)
इन संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सवर्ण समाज की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “एक म्यान में 40 तलवारें” के इस संदेश ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
आंदोलन का मुख्य केंद्र: UGC का ‘काला कानून’ और शैक्षणिक संहार
इस पूरे महा-आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) का नया इक्विटी रेगुलेशन-2026 है। राज सिंह शेखावत ने इसे ‘शैक्षणिक आतंकवाद’ की संज्ञा दी है।
आंदोलन के 3 मुख्य ‘वारहेड’ (Warheads):
UGC की नई नियमावली का विरोध: सूत्रों के अनुसार, नए नियमों में सवर्ण समाज के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और शोध (Research) के अवसरों को सीमित करने का गुप्त एजेंडा है।
EWS का सरलीकरण: आर्थिक आधार पर आरक्षण (EWS) में लगी ‘कठिन शर्तों’ और 8 लाख की आय सीमा के पेचीदा नियमों को हटाकर इसे सुलभ बनाना।
इतिहास का पुनर्लेखन: क्षत्रिय वीरों के विकृत इतिहास को हटाकर गौरवशाली गाथाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना। “जब प्रतिभा को जाति के तराजू पर तौला जाता है, तो देश का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, किसी के विरोध में नहीं।”
— राज सिंह शेखावत
विश्लेषण /केसरिया सैलाब की पदचाप
आज दिल्ली में जो हुआ, वह आने वाले समय के बड़े सियासी भूचाल का ट्रेलर मात्र है। 40 संगठनों की यह एकजुटता यह दर्शाती है कि सवर्ण अब ‘वोट बैंक’ की राजनीति का शिकार होने के बजाय स्वयं एक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गए हैं। राज सिंह शेखावत ने बिखरे हुए सवर्णों को एक ‘केसरिया सूत्र’ में पिरो दिया है। यदि सरकार ने समय रहते इन मांगों पर विचार नहीं किया, तो यह सैलाब संसद की दहलीज तक पहुंचने में देर नहीं लगाएगा।
विशेष ब्यूरो, नई दिल्ली







