दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके के होटल फ्लोरिश स्टे बी एंड बी में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। यह हादसा उस समय हुआ जब देश के अलग अलग हिस्सों और विदेशों से आए मरीज और उनके परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां ठहरे हुए थे। होटल के आसपास कई बड़े अस्पताल मौजूद हैं जहां अफगानिस्तान और बांग्लादेश समेत कई देशों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन इस दर्दनाक घटना ने कई परिवारों की खुशियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया और पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।

सीए विवेक अग्रवाल का पूरा परिवार हादसे में खत्म
इस हादसे में गुरुग्राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल का पूरा परिवार भी खत्म हो गया। विवेक अपनी पत्नी तरजिनी, मां प्रेमलता, दो बेटियों जीविसा और वारिया समेत परिवार के कई सदस्यों के साथ होटल में ठहरे हुए थे। कुल मिलाकर परिवार के आठ लोग इस आग की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। हादसे के बाद उनके घर पर मातम पसरा हुआ है और आसपास के लोग इस त्रासदी को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। पड़ोसियों के अनुसार विवेक एक मिलनसार और सम्मानित व्यक्ति थे जिनका सभी से अच्छा संबंध था।
आखिरी फोन कॉल में बचने की उम्मीद टूट गई
रिश्तेदारों ने बताया कि आग लगने के दौरान विवेक अग्रवाल ने अपने परिजनों को फोन कर आखिरी बार संपर्क किया था। उस कॉल में उन्होंने कहा था कि शायद अब बचना मुश्किल है। रिश्तेदारों ने उन्हें गीले कपड़े से मुंह ढकने की सलाह दी थी लेकिन धुआं और आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को भी बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। बताया जा रहा है कि विवेक की पत्नी एक एनजीओ चलाती थीं और दोनों बेटियों का भविष्य संवारने की तैयारी कर रहे थे लेकिन यह हादसा पूरे परिवार को निगल गया।
अस्पताल में भर्ती पिता ही बचे जीवित, पूरा परिवार खत्म
इस दर्दनाक हादसे में केवल विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल ही जीवित बचे हैं जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार के बाकी सभी सदस्य हादसे का शिकार हो गए। विवेक के रिश्तेदारों ने बताया कि घटना के समय पूरा परिवार होटल में मौजूद था और आग ने तेजी से पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। मृतकों में विवेक के मामा मामी और अन्य रिश्तेदार भी शामिल हैं जो राजस्थान के किशनगढ़ से आए थे। एक ही परिवार के इतने लोगों की मौत ने पूरे समाज को झकझोर दिया है।
संकरी गली और सुरक्षा इंतजाम पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि होटल तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकरा था और आग से बचने के लिए कोई वैकल्पिक निकास मार्ग मौजूद नहीं था। परिजनों का कहना है कि अगर उचित सुरक्षा व्यवस्था होती तो शायद इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं लेकिन यह हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया है।







