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भारत-साइप्रस निवेश दोगुना करने की योजना से वैश्विक साझेदारी में आया बड़ा बदलाव

By Neha
On: Friday, May 22, 2026 5:11 PM
भारत-साइप्रस निवेश दोगुना करने की योजना से वैश्विक साझेदारी में आया बड़ा बदलाव
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता को भारत–साइप्रस संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत का मुख्य फोकस व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को मजबूत करना रहा।

निवेश और व्यापार साझेदारी को नई उड़ान

बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस के बीच विश्वास लगातार मजबूत हुआ है और पिछले दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हो चुका है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में इस निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी नई संभावनाओं पर चर्चा हुई। साइप्रस को भारत और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण निवेश गेटवे के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा विस्तार मिलेगा।

रणनीतिक साझेदारी और सेक्टर आधारित सहयोग

भारत और साइप्रस ने अपने संबंधों को आधिकारिक तौर पर रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा, कृषि, शिपिंग और मैरीटाइम सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। गिफ्ट सिटी को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने की दिशा में भी साइप्रस के साथ साझेदारी मजबूत करने की बात हुई। साथ ही स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी सहमति बनी, जिससे दोनों देशों के युवा उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे।

https://twitter.com/i/broadcasts/1vJpPrMoRwOJE

रक्षा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण

वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी महत्वपूर्ण एजेंडा बनाया गया। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही मिलिट्री ट्रेनिंग और एक्सचेंज कार्यक्रमों को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इंडो–पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव और IMEC कॉरिडोर पर संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। वहीं यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट जैसे वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों ने शांति और स्थिरता के पक्ष में साझा रुख अपनाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की नई दिशा तय होती दिखी।

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