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मिडिल-ईस्ट संघर्ष के बीच भारत का बड़ा बयान क्यों समुद्री मार्ग पर जोर दिया गया

By Neha
On: Friday, April 3, 2026 8:36 AM
मिडिल-ईस्ट संघर्ष के बीच भारत का बड़ा बयान क्यों समुद्री मार्ग पर जोर दिया गया
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मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पुनः खोलने की जोरदार मांग की है। यह जलमार्ग वर्तमान में Iran के नियंत्रण में है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मुद्दे पर आयोजित एक बहुपक्षीय बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि इस मार्ग में व्यवधान से न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों में भी तेजी आई है। भारत का यह रुख उसकी ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार हितों को ध्यान में रखते हुए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

60 देशों की बैठक में भारत की भागीदारी

यह बैठक United Kingdom की पहल पर वर्चुअल रूप में आयोजित की गई, जिसमें 60 से अधिक देशों ने भाग लिया। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव Vikram Misri ने किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित और निर्बाध शिपिंग सुनिश्चित करना था, क्योंकि इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार को प्रभावित करती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने इस मंच पर अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांत को मजबूती से रखा और सभी देशों से सहयोग की अपील की।

भारत ने उठाया नुकसान और ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा

विदेश सचिव ने बैठक में बताया कि मौजूदा संघर्ष के दौरान भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने इस क्षेत्र में अपने नागरिकों को खोया है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, विदेशी झंडे वाले जहाजों पर सवार कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक घायल हुआ है। इसके अलावा कई जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। इस स्थिति ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रभावित किया है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है और उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर करती है।

भारत का कूटनीतिक समाधान पर जोर और प्रवासी भारतीयों की स्थिति

भारत ने स्पष्ट किया कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। विदेश सचिव Vikram Misri ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील की। भारत ने बार-बार यह भी कहा है कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले अस्वीकार्य हैं और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित होना चाहिए। इस बीच, खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और दूतावास लगातार उनसे संपर्क में हैं, हालांकि अब तक आठ भारतीयों की मौत हो चुकी है और एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है।

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