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भारत ने ईरान-इजराइल युद्ध के बीच शुरू किया मिशन मोड, आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि

By Neha
On: Wednesday, March 25, 2026 8:47 AM
भारत ने ईरान-इजराइल युद्ध के बीच शुरू किया मिशन मोड, आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि
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पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। भारत सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता को इसके दुष्प्रभावों से बचाने के लिए मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री ने मंगलवार 24 मार्च 2026 को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि संकट के मद्देनजर सरकार ने ईंधन, उर्वरक और जरूरी सामानों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए 7 एम्पावर्ड ग्रुप का गठन किया है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि यह समूह COVID-19 महामारी के दौरान बनाई गई समितियों की तर्ज पर काम करेगा और पेट्रोलियम, नेचुरल गैस, सप्लाई चेन और महंगाई जैसे क्षेत्रों में तत्काल फैसले लेगा।

वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत की प्राथमिकताएँ

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में बताया कि करीब तीन हफ्तों से जारी युद्ध ने केवल तेल की कीमतों को बढ़ाया ही नहीं बल्कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से भारत के लिए संकट और गंभीर हो गया है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कई भारतीय चालक दल फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं। सरकार ने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

किसानों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित

प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि आगामी खरीफ बुवाई के लिए उर्वरक (खाद) का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वैश्विक संकट का बोझ किसानों पर न पड़े। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को कड़ा निर्देश दिया है कि युद्ध या संकट के बहाने कोई भी कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों पर सख्त निगरानी रखी जाए। सरकार यह भी देख रही है कि आवश्यक सामानों की सप्लाई में कोई रुकावट न आए और आम जनता को महंगाई के अतिरिक्त दबाव का सामना न करना पड़े।

सामरिक तेल भंडार और वैकल्पिक स्रोतों की खोज

सरकार ने सामरिक तेल भंडार को 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 6.5 मिलियन मीट्रिक टन करने पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही भारत पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक स्तर पर उपलब्ध सभी विकल्पों की खोज में जुट गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में देश के पास पर्याप्त ऊर्जा और संसाधन उपलब्ध हों। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हर स्तर पर सक्रिय और तैयार है और संकट के हर पहलू को नियंत्रित करने का प्रयास जारी है।

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