देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी से आम जनता की चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार 15 मई को पेट्रोल के दाम में 3.25 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद कीमत 107.97 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। वहीं डीजल भी 3.02 रुपये महंगा होकर 93.23 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर डाला है, जिससे महंगाई को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है।

सचिन पायलट का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
इस मुद्दे पर राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी पहले से तय थी और जनता को चुनाव के बाद इसका झटका दिया गया है। पायलट ने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान कीमतें नियंत्रित रखी जाती हैं, लेकिन जैसे ही मतदान खत्म होता है, जनता पर आर्थिक बोझ डाल दिया जाता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
‘वोट लो, फिर कीमत बढ़ाओ’ बयान से सियासत गरमाई
सचिन पायलट ने कहा कि “वोट लो, फिर कीमत बढ़ाओ” जैसी नीति जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई। उनके अनुसार यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका सीधा असर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की जेब पर पड़ रहा है। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
महंगाई के बीच आम जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरत की चीजों पर पड़ता है। ऐसे में इस बढ़ोतरी से महंगाई और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में उछाल से सप्लाई चेन की लागत बढ़ेगी, जिसका भार अंततः आम उपभोक्ता पर पड़ेगा। इस बीच सचिन पायलट का बयान राजनीतिक तौर पर एक बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ गया है, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।








