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दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र के आदेश पर तत्काल रोक से इनकार

By Neha
On: Tuesday, May 26, 2026 2:00 PM
दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र के आदेश पर तत्काल रोक से इनकार
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लुटियंस दिल्ली स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के केंद्र सरकार के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने मामले को पूरी तरह खारिज नहीं किया और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 8 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला क्लब की प्रशासनिक संरचना और संपत्ति के अधिकारों से जुड़ा हुआ है, जिस पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल यह मामला अंतरिम राहत के स्तर पर ही विचार योग्य है और अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।

सुनवाई में कपिल सिब्बल की दलीलें, सरकार के अधिकारों पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में जोरदार दलीलें पेश कीं और केंद्र सरकार के आदेश को संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था या संपत्ति पर सरकार को इस तरह कब्जा लेने का अधिकार संविधान की भावना के विपरीत है। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि एक बार यदि सरकार परिसर में प्रवेश कर लेती है तो उसे हटाना बेहद कठिन हो जाता है, जिससे कानूनी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि पूरे मामले की पृष्ठभूमि को गंभीरता से देखा जाए।

केंद्र सरकार का पलटवार, ‘पूर्व समिति’ के अस्तित्व पर उठाया सवाल

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ‘पूर्व समिति’ जैसा कोई वैध कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने कोर्ट में सवाल उठाया कि जिन लोगों की स्थिति ही स्पष्ट नहीं है, वे याचिका कैसे दाखिल कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी याचिकाकर्ताओं की वैधता पर सवाल उठाए और कहा कि जिन लोगों को पहले ही पद से हटाया जा चुका है, वे किस हैसियत से अदालत में पेश हो रहे हैं। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि सभी सदस्य अब भी वैध रूप से जुड़े हुए हैं और उनकी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

NCLT और NCLAT के फैसलों का हवाला, कानूनी लड़ाई और तेज

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) पहले ही इस समिति को हटाने का फैसला दे चुके हैं, जिसे 2020 में भी बरकरार रखा गया था। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे किस हैसियत से यह याचिका दाखिल कर रहे हैं, सदस्य के तौर पर या पूर्व समिति के रूप में। वहीं कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि सरकार की कार्रवाई को उचित प्रक्रिया के बिना लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मामले में सभी पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा और अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

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