व्हाटअप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करे 👉
---Advertisement---

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बंगाल चुनाव विवाद, TMC ने उठाए वोटर लिस्ट हटाने के सवाल

By Neha
On: Monday, May 18, 2026 4:54 PM
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बंगाल चुनाव विवाद, TMC ने उठाए वोटर लिस्ट हटाने के सवाल
---Advertisement---

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़े एक बड़े मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने दावा किया है कि राज्य की कई विधानसभा सीटों पर जीत और हार का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से भी कम है, जिनके नाम स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। टीएमसी ने सोमवार को हुई सुनवाई में कहा कि इन हटाए गए मतदाताओं की अपीलें अभी भी अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित हैं और उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं मिला। पार्टी का आरोप है कि इससे चुनाव परिणाम सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

कोर्ट में रखे गए आंकड़ों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि कम से कम 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर इतना कम था कि हटाए गए मतदाताओं की संख्या उससे कहीं ज्यादा थी। उन्होंने अदालत को बताया कि एक सीट पर टीएमसी उम्मीदवार केवल 863 वोटों से हार गया, जबकि उसी क्षेत्र में 5432 मतदाताओं की अपील ट्रिब्यूनल में लंबित थी। बनर्जी ने कहा कि अगर इन लोगों को मतदान का अधिकार मिला होता तो नतीजे पूरी तरह बदल सकते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्यभर में लगभग 35 लाख लोग मतदान नहीं कर सके क्योंकि उनकी अपीलों का निपटारा नहीं हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी विस्तृत जानकारी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने टीएमसी को विस्तृत अंतरिम आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि पार्टी यह दावा कर रही है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का असर चुनाव परिणामों पर पड़ा है, तो उसके लिए विस्तृत तथ्य और आंकड़े पेश करने होंगे। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची की पुरानी टिप्पणी का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा होगी तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है। टीएमसी ने इसी आधार पर न्यायिक जांच की मांग की।

चुनाव आयोग और अदालत के बीच कानूनी बहस तेज

सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी भी पेश हुईं। उन्होंने कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों के निपटारे में चार साल तक लग सकते हैं और तब तक कई चुनाव गुजर जाएंगे। वहीं चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील दामा शेषाद्री ने कहा कि किसी भी सीट के परिणाम को चुनाव याचिका के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इसके जवाब में कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्ट करने की मांग की कि वोटर लिस्ट से नाम हटाना भी चुनाव याचिका का आधार माना जाए। हालांकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत ऐसा सामान्य आदेश कैसे दे सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---