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TMC के 20 सांसदों ने किया NCPI में विलय का दावा, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने ही जताई अनभिज्ञता

By Neha
On: Monday, June 15, 2026 2:07 PM
TMC के 20 सांसदों ने किया NCPI में विलय का दावा, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने ही जताई अनभिज्ञता
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आ गया जब TMC के 20 सांसदों ने NCPI में विलय का दावा कर दिया। लेकिन जिस पार्टी में विलय की बात कही गई, उसके शीर्ष नेता ने ही इस घटनाक्रम से अनभिज्ञता जताकर पूरे मामले को और रहस्यमय बना दिया।

विलय के दावे ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

राजनीति में अक्सर ऐसे घटनाक्रम सामने आते हैं जो अचानक सुर्खियों में आ जाते हैं। इस बार चर्चा का केंद्र TMC के 20 सांसद हैं जिन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI में शामिल होने का दावा किया। इतना ही नहीं, उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग पहचान की मांग भी रखी। इस कदम ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी।

जब NCPI नेतृत्व भी रह गया हैरान

पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब NCPI के संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन सचिव शांतनु दे ने कहा कि उन्हें इस कथित विलय की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने बताया कि सांसदों की ओर से अब तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बातचीत करना चाहता है तो पार्टी उसका स्वागत करेगी।

संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर

शांतनु दे ने स्पष्ट किया कि किसी भी विलय या राजनीतिक फैसले के लिए संविधान और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। उनका कहना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक कदम को केवल घोषणाओं के आधार पर नहीं बल्कि कानूनी और संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाना चाहिए। यही वजह है कि उन्होंने औपचारिक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।

एनडीए और मोदी सरकार पर खुला समर्थन

इस पूरे विवाद के बीच NCPI का राजनीतिक रुख भी चर्चा में आ गया है। शांतनु दे ने खुलकर कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों का समर्थन करती है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में कई बड़े बदलाव हुए हैं और इसी वजह से उनकी पार्टी भाजपा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है।

छोटी पार्टी अचानक चर्चा के केंद्र में

दिलचस्प बात यह है कि NCPI का पंजीकरण वर्ष 2023 में हुआ था और अब तक यह राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत कम चर्चित पार्टी रही है। सीमित संसाधनों और संगठनात्मक चुनौतियों के बावजूद अचानक राष्ट्रीय स्तर पर उसका नाम सुर्खियों में आ गया है। हावड़ा स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने से भी अटकलें तेज हो गई हैं।

आगे क्या होगा?

अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या TMC सांसदों का यह दावा संवैधानिक और कानूनी कसौटी पर खरा उतरेगा या यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति साबित होगी। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रेस कॉन्फ्रेंस और संभावित कानूनी प्रक्रिया इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

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