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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा एक्शन: आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले 114 प्रकाशन और डिजिटल दस्तावेज जब्त

On: Thursday, August 13, 2026 10:43 PM
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  • गृह विभाग ने आधिकारिक राजपत्र (गजट) जारी कर आतंकवादी संगठनों से जुड़े साहित्य पर लगाया प्रतिबंध।
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 98(1) के तहत की गई सख्त कानूनी कार्रवाई। मुंबई / महाराष्ट्र:
    महाराष्ट्र सरकार ने राज्य और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने तथा युवाओं को खतरनाक उग्रवादी विचारधारा से बचाने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। राज्य के गृह विभाग ने आतंकवाद, हिंसा और कट्टरपंथ का प्रचार करने वाली 114 (एक सौ चौदह) पत्रिकाओं, पुस्तकों और डिजिटल सामग्रियों की खरीद-फरोख्त, भंडारण और प्रसार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाते हुए उन्हें सरकार के पक्ष में जब्त करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा औपचारिक राजपत्र (गजट नोटिफिकेशन) जारी कर दिया गया है।
    क्यों लिया गया यह कड़ा निर्णय?
    राज्य के आतंकवाद विरोधी पथक (ATS) द्वारा की गई लंबी जांच, विभिन्न खुफिया एजेंसियों (इंटेलिजेंस इनपुट) से मिले गुप्त संकेतों और व्यापक साइबर निगरानी से यह बात सामने आई थी कि तमाम पाबंदियों के बावजूद कुछ असामाजिक तत्व इंटरनेट, सोशल मीडिया और मुद्रित माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी साहित्य का प्रसार कर रहे थे।
    सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की सामग्री हिंसक अतिवाद का महिमामंडन करती है, संवेदनशील और युवा वर्ग का ब्रेनवॉश कर उन्हें उग्रवाद की ओर धकेलती है, तथा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों में उनकी भर्ती को सुगम बनाती है। यह सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति के लिए एक गंभीर खतरा है।
    किन संगठनों और सामग्रियों पर गिरी गाज?
    सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए गए 114 प्रकाशनों और दस्तावेजों का सीधा संबंध दुनिया भर के कुख्यात और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
  • इस्लामिक स्टेट (ISIS / ISKP) और उससे जुड़े प्रोपेगैंडा प्रकाशन, जैसे— ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ (Voice of Khurasan) मैगजीन के विभिन्न अंक।
  • अल-क्वाइदा (Al-Qaeda in the Indian Subcontinent – AQIS) से जुड़ी पत्रिकाएं और दस्तावेज।
  • हिजबुल मुजाहिदीन के पीर पंजाल रेजिमेंट से जुड़े प्रकाशन, जैसे— ‘द रिवोल्यूशनरी रिसर्जेंस’ (The Revolutionary Resurgence)।
  • इसके अलावा ‘कश्मीर किफा’ (Kashmir Kifah), ‘द सोल ऑफ रेजिस्टेंस’ और ‘नवाई गजवा-ए-हिंद’ जैसी सामग्रियां तथा बम बनाने के तौर-तरीकों या आतंकी प्रशिक्षण से जुड़ी डिजिटल नियमावली (मैनुअल) भी इस सूची में शामिल हैं।
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    इस राजपत्र अधिसूचना के लागू होने के बाद, इन सभी 114 चिन्हित प्रकाशनों और डिजिटल दस्तावेजों की छपाई, प्रकाशन, वितरण, बिक्री, प्रदर्शन, ऑनलाइन सर्कुलेशन, तथा भौतिक या डिजिटल भंडारण (पॉसेशन एंड स्टोरेज) को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया गया है।
    राज्य सरकार ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास या किसी भी परिसर में यह प्रतिबंधित सामग्री पाई जाती है, तो उसे तुरंत जब्त किया जाए और संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। सरकार के इस साहसिक और दृढ़ कदम से राज्यभर में देशविरोधी और कट्टरपंथी नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।

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