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आसाराम को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद बरकरार और तुरंत सरेंडर का आदेश

By Neha
On: Wednesday, May 27, 2026 4:10 PM
आसाराम को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद बरकरार और तुरंत सरेंडर का आदेश
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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे स्वयंभू बाबा आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया है। फिलहाल आसाराम स्वास्थ्य आधार पर पैरोल और अंतरिम जमानत के चलते जेल से बाहर था, लेकिन कोर्ट के इस आदेश के बाद अब उसे फिर से जेल लौटना होगा। इस फैसले के बाद पूरे देश में एक बार फिर यह चर्चित मामला सुर्खियों में आ गया है। अदालत परिसर में फैसले के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई थी क्योंकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।

गैंगरेप आरोप से राहत लेकिन सजा बरकरार

राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने आसाराम की उम्रकैद की सजा को सही माना लेकिन गैंगरेप के आरोपों से उसे राहत दे दी। वहीं सह आरोपी शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता और शरतचंद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। कोर्ट ने माना कि मुख्य आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जबकि अन्य दो आरोपियों के खिलाफ दोष साबित नहीं हो सके। यह मामला साल 2013 का है जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि जोधपुर स्थित आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया गया। इसके बाद देशभर में भारी हंगामा मचा था और यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था।

2018 में मिली थी उम्रकैद की सजा

जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही सह आरोपियों को भी 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई थी। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए तीनों ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान सह आरोपियों को जमानत मिल गई थी जबकि आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद रहा। बाद में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट से मेडिकल आधार पर उसे अंतरिम राहत दी गई थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि गैंगरेप और मानव तस्करी जैसे आरोपों को साबित करने वाले पर्याप्त सबूत नहीं हैं। वहीं अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान और अन्य सबूतों को मजबूत बताते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

करीब एक दशक से ज्यादा समय तक चले इस चर्चित मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सबकी नजरें संभावित सुप्रीम कोर्ट अपील पर टिक गई हैं। फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने इस केस की नियमित सुनवाई शुरू करते हुए साफ कहा था कि अब किसी भी तरह का स्थगन स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने लंबी सुनवाई और तमाम दलीलों के बाद आखिरकार अपना फैसला सुरक्षित रखा था जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि गंभीर अपराधों के मामलों में अदालतें सख्त रुख अपनाने के मूड में हैं। वहीं आसाराम के समर्थकों और विरोधियों दोनों की नजरें अब अगले कानूनी कदम पर लगी हुई हैं।

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