राजस्थान यूथ कांग्रेस के चुनाव का शोर अब थम चुका है, लेकिन इसके नतीजों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार चुनाव में बंपर वोटिंग देखने को मिली, जहां कुल 34 लाख 33 हजार से अधिक सदस्यों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस बड़े स्तर की वोटिंग के चलते संगठन को लगभग 25 करोड़ रुपये की आय होने की संभावना भी जताई जा रही है। चुनाव प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू होकर 20 मई तक चली, जिसमें प्रदेश और जिला स्तर के पदों के लिए मतदान हुआ।

अध्यक्ष पद की रेस में कड़ा मुकाबला
चुनाव समाप्त होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसके हाथ लगेगी। राजनीतिक गलियारों में मुख्य मुकाबला अभिषेक चौधरी और अनिल चोपड़ा के बीच माना जा रहा है। दोनों ही नेता युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं और अपने-अपने स्तर पर मजबूत समर्थन आधार रखते हैं। इसी कारण नतीजों से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल माना जा रहा है। संगठन के अंदर इस मुकाबले को लेकर लगातार चर्चाएं तेज हैं।
नतीजों के लिए करना होगा लंबा इंतजार
यूथ कांग्रेस चुनाव के बाद अब परिणामों का इंतजार करीब एक से दो महीने तक बढ़ सकता है। वोटिंग के बाद पूरी प्रक्रिया स्क्रूटनी के चरण से गुजरेगी, जिसमें वोटों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा—अप्रूव, रिजेक्ट और होल्ड। केवल अप्रूव वोट ही उम्मीदवारों के खाते में जोड़े जाएंगे, जबकि संदिग्ध या गलत वोटों को हटाया जाएगा। इसके बाद प्रत्याशियों के इंटरव्यू भी होंगे, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि प्रदेश अध्यक्ष कौन बनेगा।
राजस्थान की बड़ी राजनीति पर भी पड़ेगा असर
यूथ कांग्रेस चुनाव का प्रभाव केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। कई बड़े नेताओं ने इस चुनाव में अपने समर्थक उम्मीदवारों को खुला समर्थन दिया है, जिससे राजनीतिक समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं। संगठन के अंदर गुटबाजी की आशंका के बीच चुनाव का सफलतापूर्वक संपन्न होना ही एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब सबकी नजरें आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो राजस्थान की युवा राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।








