साई भागीरथ के खिलाफ चल रहे POCSO मामले में अब एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। साइबराबाद पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नई और गंभीर धारा 64(2)(M) जोड़ दी है। यह धारा तब लागू की जाती है जब किसी एक ही पीड़िता के साथ बार-बार दुष्कर्म के आरोप सिद्ध होने की संभावना बनती है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे सबूत सामने आए हैं जिनसे संकेत मिलता है कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता के साथ कई बार यौन शोषण किया। इस कदम के बाद केस की गंभीरता और बढ़ गई है।

पहले से जेल में बंद आरोपी पर बढ़ा दबाव
आरोपी बंडी साई भागीरथ पहले से ही POCSO मामले में गिरफ्तार हैं और फिलहाल चारलापल्ली जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। यह मामला साइबराबाद पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। नई धारा जुड़ने के बाद अब केस की कानूनी जटिलता और भी बढ़ गई है। पुलिस का कहना है कि यह कदम केवल जांच में मिले ठोस सबूतों के आधार पर उठाया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां अब मामले को बेहद गंभीरता से आगे बढ़ा रही हैं।
पीड़िता के बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट बने आधार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पहले यह मामला POCSO एक्ट और अन्य धाराओं के तहत दर्ज था, लेकिन पीड़िता के विस्तृत बयान, मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच के बाद नई धारा जोड़ी गई। यह संशोधन 18 मई 2026 को आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया और अदालत से भी इसकी अनुमति मिल चुकी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पीड़िता के बयान और मेडिकल सबूत इस फैसले में निर्णायक साबित हुए हैं। अब पुलिस केस में आगे और भी धाराएं जोड़ने की संभावना से इनकार नहीं कर रही है।
कानूनी लड़ाई तेज, सजा की संभावना और बढ़ी
इस मामले को अब पहले से कहीं अधिक गंभीर अपराध के रूप में देखा जा रहा है। यदि अदालत में आरोप साबित हो जाते हैं तो आरोपी को दस साल की कठोर सजा से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। फिलहाल पुलिस आगे की पूछताछ में जुटी है और अन्य सबूतों की भी जांच कर रही है। दूसरी ओर आरोपी के वकीलों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। अगली सुनवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।








