पालघर संवाददाता, ख़बरदीप जनमंच नेटवर्क: वाढवण बंदरगाह (पोर्ट) परियोजना से प्रभावित होने वाले मछुआरा समाज के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और सही तरीके से मुआवाज़े व पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पालघर जिला प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह प्रभावित मछुआरों के अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
जिला प्रशासन के अनुसार, जब से वाढवण बंदरगाह परियोजना की योजना शुरू हुई है, तभी से स्थानीय मछुआरों की आजीविका और उनके आर्थिक हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके लिए पूर्व में कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं और मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से मछुआरों के साथ मुआवाज़े के मसौदे पर प्राथमिक चर्चा भी की गई है।
यह समझने के लिए कि प्रभावित क्षेत्र के परिवारों की आजीविका मछली पकड़ने पर कितनी निर्भर है, जेएनपीए (JNPA) द्वारा पहले एक प्रत्यक्ष सर्वेक्षण (सर्वे) किया गया था। हालांकि, कुछ मछुआरा समूहों की सीमित भागीदारी के कारण वह सर्वे पूरा नहीं हो सका था। इसे ध्यान में रखते हुए, अब प्रशासन लोगों में जागरूकता और विश्वास बढ़ाने के लिए स्थानीय हितधारकों से लगातार संवाद स्थापित कर रहा है।
सर्वे से प्राप्त आंकड़ों और हितधारकों के साथ हुई चर्चाओं के आधार पर जेएनपीए (JNPA) ने प्रभावित मछुआरों के मुआवाज़े का एक प्रारूप तैयार करके जिला प्रशासन को सौंपा है।
मुआवाज़े की प्रस्तावित राशियां
प्रस्तावित मुआवाज़े की गणना 9 मार्च 2023 के शासन निर्णय (जीआर) के आधार पर की गई है।
इसमें मछुआरों को चार श्रेणियों (C1 से C4) में बांटकर दरें तय की गई थीं। महंगाई को ध्यान में रखते हुए, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर 2025 तक की दरों में सुधार किया गया है।
मछली पकड़ने के तरीके और आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर मुआवाज़ा तय किया गया है:
- बंदरगाह की सीमा के भीतर मछली पकड़ने वालों के लिए:
- एक दिन की डोल नेट (Dol Net) मासेमारी के लिए: ₹14.15 लाख
- कई दिनों की गिल नेट (Gill Net) मासेमारी के लिए: ₹15.72 लाख
- बंदरगाह की सीमा से बाहर मछली पकड़ने वालों के लिए:
- एक दिन की डोल नेट (Dol Net) मासेमारी के लिए: ₹7.08 लाख
- कई दिनों की गिल नेट (Gill Net) मासेमारी के लिए: ₹7.86 लाख
- हाथ से मछली, सीप या अन्य समुद्री जीव एकत्र करने वालों के लिए: ₹4.90 लाख
- केवल परिवार के गुजारे के लिए मछली पकड़ने वालों के लिए: ₹2.45 लाख
विशेष रूप से कमजोर और अधिक जरूरतमंद मछुआरा परिवारों (C3 और C4 श्रेणी) की सहायता के लिए मुआवाज़ा राशि में 2 गुना बढ़ोतरी (2x Multiplier) का प्रस्ताव रखा गया है।
कल्याणकारी योजनाएं और बुनियादी सुविधाएं
केवल नकद मुआवाज़े के अलावा, मछुआरा समाज के दीर्घकालिक विकास और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं:
- 100 करोड़ रुपये का मछुआरा कल्याण कोष: 2023 के फैसले में तय 50 करोड़ रुपये के स्थान पर अब 100 करोड़ रुपये का ‘मछुआरा कल्याण कोष’ बनाने का प्रस्ताव है। इस राशि का उपयोग मछुआरों के कौशल विकास, आजीविका वृद्धि और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए किया जाएगा।
- 250 करोड़ रुपये का नया मत्स्य बंदरगाह (Fishing Harbour): राज्य सरकार के सहयोग से एक नए मछली पकड़ने के बंदरगाह का निर्माण किया जाएगा। इससे नौकाओं को सुरक्षित खड़ा करने, मछली उतारने, बेचने और रखरखाव में मदद मिलेगी।
- 100 करोड़ रुपये से आईटीआई (ITI) का विकास: पालघर जिले के 5 सरकारी आईटीआई (ITI) को उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां आधुनिक मत्स्य पालन, समुद्री सुरक्षा और नई तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
8 सितंबर को आयोजित होगी महत्वपूर्ण बैठक
इस प्रक्रिया के अगले चरण के रूप में, जिला प्रशासन ने 8 सितंबर को जेएनपीए (JNPA) के अधिकारियों की मौजूदगी में स्थानीय नागरिकों, मछुआरा प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की एक विशेष बैठक बुलाई है।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित मुआवाज़ा पैकेज की पूरी जानकारी प्रस्तुत करना, मछुआरा समाज के सुझाव व शिकायतें सुनना और पैकेज को अंतिम स्वीकृति देने से पहले व्यापक चर्चा करना है।
जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य स्थानीय मछुआरा समाज के हितों और उनकी आजीविका की दीर्घकालिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही वाढवण बंदरगाह परियोजना को आगे बढ़ाना है।
डॉ. इंदु रानी जाखड़
जिलाधिकारी, पालघर






