पात्र लाभार्थियों के खातों में ब्याज रिफंड की रकम तुरंत होगी जमा; एक ही दिन में 21 करोड़ रुपये का हुआ वितरण
मुंबई, 11 अगस्त 2026: राज्य के पात्र लाभार्थियों और नवउद्योजकों को बड़ा आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, महाराष्ट्र शासन द्वारा वर्ष 2026-27 के वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित 750 करोड़ रुपये के कुल बजटीय प्रावधान में से 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निधि अण्णासाहेब पाटील आर्थिक पिछड़ा विकास महामंडळ को प्राप्त हो चुका है। इसके साथ ही चालू वित्तीय वर्ष में महामंडळ को मिलने वाली कुल राशि अब बढ़कर 450 करोड़ रुपये हो गई है।
सिलसिलेवार इस प्रकार आया निधि
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, महामंडळ को इससे पहले गत 20 मई 2026 को 150 करोड़ रुपये का प्रथम चरण का निधि प्राप्त हुआ था, जिसके माध्यम से पात्र लाभार्थियों को उनके ब्याज रिफंड की राशि का वितरण किया गया था। तत्पश्चात, बड़ी संख्या में लंबित मामलों के त्वरित निपटान हेतु राज्य शासन ने गत 3 अगस्त 2026 को एक विशेष शासन निर्णय (GR) जारी कर 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि को मंजूरी प्रदान की। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए यह संपूर्ण राशि आगामी 9 अगस्त को महामंडळ के आधिकारिक बैंक खाते में सुरक्षित रूप से जमा करा दी गई।
एक ही दिन में 21 करोड़ रुपये का सीधा वितरण
नवीनतम प्राप्त निधि का सकारात्मक प्रभाव तुरंत देखने को मिला है। महामंडळ द्वारा गत 10 अगस्त को पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करते हुए पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे तौर पर लगभग 21 करोड़ रुपये की ब्याज रिफंड राशि का वितरण कर दिया गया है। इस त्वरित कार्रवाई से लंबे समय से ब्याज रिफंड की प्रतीक्षा कर रहे लाभार्थियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर
महामंडळ के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, जिन पात्र लाभार्थियों के प्रकरण अभी भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं, उन सभी मामलों की आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी छानबीन युद्ध स्तर पर जारी है। औपचारिकताएं पूर्ण होते ही इन सभी शेष मामलों के अंतर्गत देय ब्याज रिफंड की राशि भी संबंधित लाभार्थियों के बैंक खातों में तुरंत ट्रांसफर कर दी जाएगी।
नवउद्योजकों को मिलेगा मजबूत आर्थिक आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि महामंडळ की विभिन्न स्वरोजगार और उद्योगोन्मुखी योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए इस प्रकार निरंतर और पर्याप्त मात्रा में निधि का प्रवाह अत्यंत आवश्यक है। शासन स्तर से मिले इस बड़े वित्तीय बल से लंबित मामलों को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जिससे राज्य के आकांक्षी नवउद्योजकों को अपने व्यवसाय को सुदृढ़ बनाने और आर्थिक स्थिरता हासिल करने में मदद मिलेगी।






