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पश्चिम बंगाल राजनीति में उथल पुथल BJP ने TMC नेताओं पर पूरी तरह बंद किए दरवाजे

By Neha
On: Tuesday, June 2, 2026 1:22 PM
पश्चिम बंगाल राजनीति में उथल पुथल BJP ने TMC नेताओं पर पूरी तरह बंद किए दरवाजे
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला है. इस बार केंद्र में हैं समिक भट्टाचार्य जिन्होंने साफ शब्दों में बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के किसी भी बागी विधायक को भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का तृणमूलकरण कभी स्वीकार नहीं होगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और गुटबाजी की खबरें लगातार तेज हो रही हैं. उनके इस रुख को पार्टी की सख्त रणनीति और संगठनात्मक अनुशासन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

बीजेपी की रणनीति और टीएमसी के खिलाफ खुला मोर्चा

समिक भट्टाचार्य ने अपने बयान में यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के लिए बीजेपी के दरवाजे पूरी तरह बंद हैं. उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने बिना किसी बाहरी नेता के सहयोग के 207 सीटों पर जीत हासिल की थी. उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने स्पष्ट रूप से टीएमसी के खिलाफ मतदान किया है. उनके अनुसार भाजपा की रणनीति अब जमीनी स्तर से मजबूत की जा रही है और संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाया जा रहा है. इस बयान को टीएमसी के खिलाफ बीजेपी की नई राजनीतिक लाइन के रूप में देखा जा रहा है जो भविष्य की चुनावी रणनीति को भी प्रभावित कर सकती है.

टीएमसी में गहराता संकट और विधायकों की दूरी

दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के भीतर संकट गहराता जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई थी. लेकिन इस बैठक में लगभग 80 में से केवल 20 विधायक ही शामिल हुए. यह स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. बैठक रद्द होने के बाद पार्टी में अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी की चर्चाएं और तेज हो गई हैं. कहा जा रहा है कि कुछ विधायक खुले तौर पर नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है.

बागी विधायकों की चाल और सीआईडी जांच से बढ़ी हलचल

टीएमसी ने हाल ही में दो विधायकों को निष्कासित किया है जिनमें रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा शामिल हैं. इसके बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष और गहरा गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार कई विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए और कुछ ने बागी नेताओं से मुलाकात भी की है. इस पूरे मामले में अभिषेक बनर्जी से जुड़ा विवाद भी सामने आया है क्योंकि कुछ दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांच सीआईडी कर रही है. तीन विधायकों ने यह दावा किया है कि दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं. अब बागी गुट इस रणनीति में है कि यदि उनके पास पर्याप्त संख्या में विधायक आ जाते हैं तो वे नया नेतृत्व चुनने का दावा पेश कर सकते हैं जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है.

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