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धार्मिक परंपरा और विवाद का नया मोड़, केदारनाथ-बद्रीनाथ में दर्शन के लिए शपथ पत्र अनिवार्य

By Neha
On: Wednesday, March 18, 2026 5:04 PM
धार्मिक परंपरा और विवाद का नया मोड़, केदारनाथ-बद्रीनाथ में दर्शन के लिए शपथ पत्र अनिवार्य
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध चार धामों में शामिल केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों में दर्शन की नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने निर्णय लिया है कि अब श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करने के लिए सनातन धर्म में आस्था का शपथ पत्र देना होगा। इस व्यवस्था के तहत केवल वही व्यक्ति दर्शन कर पाएंगे, जो सनातन धर्म में अपनी आस्था का प्रमाण देगा। समिति का कहना है कि यह कदम धार्मिक परंपराओं की रक्षा और आस्था की गंभीरता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

सारा अली खान को उदाहरण बनाकर स्पष्ट किया निर्णय

समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस फैसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी आस्था व्यक्त करता है और शपथ पत्र देता है, तो उसे दर्शन की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान का उदाहरण दिया, जो पहले भी केदारनाथ धाम आ चुकी हैं और पूजा-अर्चना कर चुकी हैं। हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सारा अली खान जैसी हस्तियों को भी यदि शपथ पत्र के माध्यम से आस्था प्रमाणित करनी है, तो उन्हें दर्शन करने से नहीं रोका जाएगा।

शपथ पत्र मंदिर परिसर में ही उपलब्ध कराए जाएंगे

बदरी-केदार मंदिर समिति ने बताया कि यह शपथ पत्र मंदिर परिसर में उपलब्ध कराया जाएगा। इससे श्रद्धालु मौके पर ही अपनी आस्था का प्रमाण दे सकेंगे। नए नियम के लागू होने से अब प्रदेश में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे धार्मिक परंपराओं की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे विवादास्पद और भेदभावपूर्ण मान रहे हैं। चारधाम यात्रा सीजन में इसका असर और कैसे सामने आता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

कांग्रेस ने उठाया सवाल, सारा अली खान की आस्था पर भी विवाद

इस पूरे मामले पर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने BKTC और हेमंत द्विवेदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मंदिरों की मर्यादा और श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचा रही है। सारा अली खान की आस्था पर सवाल उठाने और शपथ पत्र मांगने पर पॉल ने आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि क्या अन्य मुस्लिम नेताओं से भी इसी तरह का प्रमाण मांगा जाएगा। पॉल ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया और चेतावनी दी कि यदि तुरंत माफी नहीं मांगी गई, तो जनता और ईश्वर दोनों को खीझ होगी।

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