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रिजेक्शन और संघर्ष के बाद मिली सफलता, सिद्धार्थ गुप्ता की अनसुनी कहानी

By Neha
On: Friday, May 8, 2026 6:31 PM
रिजेक्शन और संघर्ष के बाद मिली सफलता, सिद्धार्थ गुप्ता की अनसुनी कहानी
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मनोरंजन जगत में हर चमकती सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी होती है। ऐसा ही सफर रहा Siddharth Gupta का, जिन्होंने कभी ध्वनि भानुशाली के सुपरहिट म्यूजिक वीडियो ‘Vaaste’ से रातों-रात लोकप्रियता हासिल की थी। इस गाने में उनका लुक और अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आया और वह इंटरनेट सेंसेशन बन गए थे। लेकिन इस शुरुआती पहचान के बाद असली चुनौती शुरू हुई, जब उन्हें फिल्मों और बड़े प्रोजेक्ट्स तक पहुंचने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। यह कहानी सिर्फ ग्लैमर की नहीं बल्कि धैर्य और विश्वास की भी है।

मुंबई की गलियों में लंबा संघर्ष और लगातार रिजेक्शन

सिद्धार्थ गुप्ता का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने हाल ही में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुंबई में उनके दस साल संघर्ष और इंतजार में बीते। ऑडिशन रूम के बाहर घंटों खड़े रहना, बार बार रिजेक्शन झेलना और फोन कॉल का इंतजार करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। कई बार उन्होंने हार मानने का विचार भी किया, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोड़ने के बजाय खुद पर भरोसा बनाए रखा। यह वही दौर था जब वह केवल एक ‘इंतजार करने वाले कलाकार’ के रूप में जाने जाते थे, लेकिन अंदर ही अंदर वह अपने मौके का इंतजार कर रहे थे।

फिल्म ‘कृष्णावतारम’ में मिला करियर का सबसे बड़ा ब्रेक

सिद्धार्थ गुप्ता के करियर का सबसे अहम मोड़ उनकी फिल्म Krishnavataram से आया, जिसमें उन्होंने भगवान कृष्ण की भूमिका निभाई। यह किरदार उनके लिए सिर्फ एक अभिनय नहीं बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी था। उन्होंने कहा कि इस भूमिका ने उन्हें खुद को एक कलाकार के रूप में साबित करने का मौका दिया। जिस शहर ने कभी उन्हें संघर्ष का प्रतीक माना था, उसी शहर में अब उनके बड़े-बड़े पोस्टर उनकी सफलता की कहानी कह रहे हैं। यह उनके लिए एक ऐसा क्षण था जिसने उनकी मेहनत को पहचान दिलाई।

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर

सिद्धार्थ का फिल्मी सफर 2014 में फिल्म Kuku Mathur Ki Jhand Ho Gayi से शुरू हुआ था, लेकिन उन्हें असली पहचान ‘कृष्णावतारम’ से मिली। एक दशक की मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया जहां आज वे हिंदी सिनेमा के उभरते सितारों में गिने जा रहे हैं। उनका यह सफर उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर फिल्म इंडस्ट्री में आते हैं। सिद्धार्थ की कहानी यह साबित करती है कि सफलता देर से जरूर मिलती है, लेकिन मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।

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