बिहार एआई समिट के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के एक बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पटना में 4 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कहा जाए कि ‘हरा गमछा’ पहनने वालों को खोजो तो वे तुरंत पहचान लिए जाएंगे। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है और विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं।

सीएम की सफाई और बयान पर उठे सवाल
बाद में मुख्यमंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान का किसी विशेष व्यक्ति या समूह से कोई संबंध नहीं था और यह केवल मजाकिया अंदाज में कही गई बात थी। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं। कहा जा रहा है कि उनका इशारा अप्रत्यक्ष रूप से विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल Rashtriya Janata Dal की ओर था, क्योंकि पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता हरे गमछे का इस्तेमाल करते हैं। इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
अपराध और एनकाउंटर नीति पर भी बयान
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार के लिए किसी अपराधी की कोई जाति नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस अब अपराधी की जाति देखकर कार्रवाई करेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर सरकार ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ के तहत कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत कई अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि विपक्ष एनकाउंटर नीति पर सवाल खड़े कर रहा है और इसे पक्षपातपूर्ण बता रहा है।
RJD की प्रतिक्रिया और AI समिट का एजेंडा
सीएम के बयान पर RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरा रंग खुशहाली और गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक है और इसे किसी राजनीतिक संदर्भ में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। दूसरी ओर ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित ‘बिहार AI समिट-2026’ में मुख्यमंत्री ने राज्य को एआई हब बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है और सभी विभागों को इसका अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। यह समिट राज्य में तकनीकी विकास और डिजिटल बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








