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विधायक ज्योति मांझी के काफिले पर हमला. जीतन मांझी ने पुलिस को दी चेतावनी

By Neha
On: Monday, May 18, 2026 5:16 PM
विधायक ज्योति मांझी के काफिले पर हमला. जीतन मांझी ने पुलिस को दी चेतावनी
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बिहार के गया जिले में बाराचट्टी की विधायक Jyoti Manjhi के काफिले पर हुए हमले ने राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। रविवार 17 मई 2026 को हुई इस घटना के बाद हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री Jitan Ram Manjhi ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हमला था। मांझी ने दावा किया कि यह उनकी पार्टी और अनुसूचित जाति के जनप्रतिनिधियों को डराने की कोशिश है। घटना के बाद से गया जिले में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष दोनों इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। बताया जा रहा है कि विधायक ज्योति मांझी किसी कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थीं तभी रास्ते में अचानक उनके काफिले को घेर लिया गया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी भी की गई। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।

जीतन राम मांझी का फूटा गुस्सा. पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

घटना के बाद गयाजी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए Jitan Ram Manjhi ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह उनकी पार्टी के नेताओं पर आठवां हमला है और पुलिस जानबूझकर आरोपियों को बचा रही है। मांझी ने मोहनपुर थाना प्रभारी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका रवैया अनुसूचित जाति विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर पुलिस चाहती तो सभी हमलावर तुरंत गिरफ्तार किए जा सकते थे लेकिन जानबूझकर कार्रवाई में ढिलाई बरती गई। मांझी ने यहां तक कह दिया कि मोहनपुर थाने में विधायक के खिलाफ “चक्रव्यूह” रचा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे एसएसपी और डीएम आवास का घेराव करेंगे। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

“जान लेने की कोशिश थी”. विधायक ज्योति मांझी ने सुनाई पूरी आपबीती

हमले के बाद विधायक Jyoti Manjhi ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमलावरों की मंशा बेहद खतरनाक थी। उन्होंने कहा कि अगर वह गाड़ी से नीचे उतर जातीं तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। ज्योति मांझी ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता की सेवा के लिए काम करते हैं और अगर किसी को किसी नेता से शिकायत है तो लोकतंत्र में वोट और नोटा का विकल्प मौजूद है। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। विधायक ने यह भी कहा कि उग्रवादियों की कोई जाति नहीं होती और समाज को ऐसे लोगों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी उन पर हमला किया गया था और पिछली घटना में आरजेडी कार्यकर्ताओं का नाम सामने आया था। इस बार की घटना के बाद उनके समर्थकों में भारी गुस्सा है और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम जनता का भरोसा प्रशासन पर कैसे कायम रहेगा।

सात नामजद और 20 अज्ञात पर केस. पुलिस पर बढ़ा दबाव

इस मामले में मोहनपुर थाने में सात नामजद और करीब 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने कहा है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और हमलावरों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय गवाहों की मदद ली जा रही है। हालांकि अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी की खबर सामने नहीं आई है जिससे विपक्ष लगातार सरकार और पुलिस प्रशासन को घेर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है क्योंकि इसमें जातीय और राजनीतिक दोनों पहलू जुड़े हुए हैं। दूसरी तरफ प्रशासन दावा कर रहा है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। घटना के बाद बाराचट्टी और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस सात दिनों के भीतर क्या कार्रवाई करती है और क्या इस हमले के पीछे की असली साजिश सामने आ पाएगी।

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