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उज्जैन महाकाल मंदिर में लड्डू निर्माण प्रक्रिया में ऐतिहासिक तकनीकी बदलाव

By Neha
On: Saturday, May 2, 2026 5:30 PM
उज्जैन महाकाल मंदिर में लड्डू निर्माण प्रक्रिया में ऐतिहासिक तकनीकी बदलाव
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उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की लड्डू प्रसादी को शुद्धता और गुणवत्ता के आधार पर फाइव स्टार रेटिंग प्राप्त है। मंदिर प्रबंधन समिति लंबे समय से भक्तों को उच्च गुणवत्ता और शुद्ध प्रसाद उपलब्ध कराने पर जोर देती रही है। हर दिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के साथ यह प्रसादी ग्रहण करते हैं। इसी परंपरा को और बेहतर बनाने के लिए अब बड़ा तकनीकी बदलाव किया जा रहा है।

अब हाथों से नहीं मशीनों से तैयार होंगे लड्डू

मंदिर प्रबंधन ने प्रसादी निर्माण प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है। अब महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसादी हाथों से नहीं बल्कि मशीनों के माध्यम से तैयार की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार यह कदम गुणवत्ता और स्वच्छता को और मजबूत करने के लिए उठाया गया है। यदि निर्माण प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो उस पर लाखों रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर बड़ा प्रोजेक्ट

श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन लगभग 50 क्विंटल लड्डू की खपत होती है। आने वाले सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए 40 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। इसके तहत 50 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक लड्डू प्रसादी यूनिट का निर्माण किया जाएगा। यह यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास अन्नक्षेत्र में विकसित की जाएगी।

स्वच्छता, पैकिंग और गुणवत्ता पर सख्त निगरानी

नई यूनिट में अत्याधुनिक मशीनों के जरिए लड्डू निर्माण होगा और स्वच्छता मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। सामग्री की गुणवत्ता से लेकर पैकिंग तक हर चरण की कड़ी निगरानी होगी। लड्डू प्रसादी को लगभग 15 दिनों तक ताजा बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में यह प्रसादी 50, 100, 200 और 400 रुपये के पैकेट में उपलब्ध है। किसी भी लापरवाही पर 2 लाख से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

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