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पंजाब विधानसभा में पारित ऐतिहासिक विधेयक से धार्मिक अपराधों पर सख्ती बढ़ी

By Neha
On: Sunday, April 19, 2026 12:46 PM
पंजाब विधानसभा में पारित ऐतिहासिक विधेयक से धार्मिक अपराधों पर सख्ती बढ़ी
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पंजाब में धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में अब कठोर सजा का प्रावधान कर दिया गया है। ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026’ को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभावी हो गया है। इसके तहत किसी भी प्रकार की साजिश या प्रत्यक्ष बेअदबी के दोषी को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसकी जानकारी साझा करते हुए इसे धार्मिक आस्था की सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।

विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ सख्त विधेयक

यह विधेयक पंजाब विधानसभा में 13 अप्रैल को सर्वसम्मति से पारित किया गया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पेश करते हुए भरोसा दिलाया था कि इस विषय पर अब आगे कोई और विधेयक नहीं लाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे पहले 2016 और 2018 में भी इसी मुद्दे पर कानून लाने की कोशिश हुई थी, लेकिन उन्हें केंद्र की मंजूरी नहीं मिल सकी थी। इस बार विधेयक को राज्य स्तर पर अंतिम रूप देकर कानून का दर्जा दिया गया है। सरकार ने इसे सिख समुदाय की भावनाओं की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।

सजा और जुर्माने के कड़े प्रावधान शामिल

नए कानून में बेअदबी के मामलों को बेहद गंभीर अपराध माना गया है। सामान्य मामलों में 7 से 20 साल तक की कैद और 2 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है। वहीं यदि यह अपराध किसी साजिश के तहत सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से किया गया हो, तो दोषी को आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, सहयोग करने वालों और प्रयास करने वालों के लिए भी अलग-अलग सजा का प्रावधान रखा गया है, जिससे किसी भी स्तर पर शामिल लोगों को बचने का मौका न मिले।

SGPC की भूमिका और नई निगरानी व्यवस्था लागू

संशोधन के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की सुरक्षा और प्रबंधन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की भूमिका को और मजबूत किया गया है। अब हर ‘स्वरूप’ का केंद्रीय रजिस्टर रखा जाएगा जिसमें प्रत्येक प्रति को एक यूनिक आईडी दी जाएगी। इसके साथ ही छपाई, वितरण और भंडारण की पूरी जानकारी दर्ज होगी। इस रजिस्टर को डिजिटल और भौतिक दोनों रूपों में रखा जाएगा और समय-समय पर अपडेट करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम धार्मिक ग्रंथ की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

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