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राज्यपाल के फैसले पर मचा बवाल, विजय के समर्थन में उतरे प्रकाश आंबेडकर

By Neha
On: Thursday, May 7, 2026 3:33 PM
राज्यपाल के फैसले पर मचा बवाल, विजय के समर्थन में उतरे प्रकाश आंबेडकर
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी टीवीके राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसके बावजूद सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं दिख रहा। 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है जबकि टीवीके अभी इस आंकड़े से पीछे चल रही है। विजय ने सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों से समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा भी पेश किया लेकिन राज्यपाल ने उन्हें अभी सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया। इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति में संवैधानिक अधिकारों और राज्यपाल की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

विजय के समर्थन में आए प्रकाश आंबेडकर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख और डॉ. भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर खुलकर विजय के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके को सरकार बनाने का पहला मौका मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल बहुमत को लेकर संदेह के आधार पर राज्यपाल किसी पार्टी को आमंत्रित करने से इनकार नहीं कर सकते। प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 164(2) साफ तौर पर कहता है कि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है। उनका कहना है कि पहले शपथ दिलाई जाती है और उसके बाद सदन में शक्ति परीक्षण कराया जाता है। इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति और ज्यादा गर्म हो गई है और विपक्षी दल भी राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाने लगे हैं।

संविधान और पुराने उदाहरणों का दिया हवाला

प्रकाश आंबेडकर ने अपने बयान में देश की राजनीति के दो बड़े उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी ऐसी परिस्थितियों में सबसे बड़ी पार्टी को मौका दिया गया था। उन्होंने बताया कि 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उस समय राष्ट्रपति रामास्वामी वेंकटरमण ने सबसे पहले कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए बुलाया था। हालांकि राजीव गांधी ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया था जिसके बाद वीपी सिंह को मौका मिला। इसी तरह 1996 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी लेकिन उसके पास पूर्ण बहुमत नहीं था। तब राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि वे सदन में बहुमत साबित नहीं कर सके और 13 दिन बाद इस्तीफा देना पड़ा। प्रकाश आंबेडकर का कहना है कि तमिलनाडु में भी वही संवैधानिक परंपरा लागू होनी चाहिए और विजय को मौका दिया जाना चाहिए।

तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ा तनाव

तमिलनाडु में अब पूरा सियासी फोकस राज्यपाल के अगले कदम पर टिका हुआ है। टीवीके समर्थक इसे जनादेश का सम्मान बता रहे हैं जबकि विरोधी दलों का कहना है कि बिना स्पष्ट बहुमत के सरकार बनाना अस्थिरता पैदा कर सकता है। दूसरी तरफ विजय लगातार समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई छोटे दल उनके साथ आ सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति को बेहद दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है। अगर विजय को मौका मिलता है तो यह राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है क्योंकि टीवीके ने पहली बार चुनाव लड़कर ही द्रविड़ राजनीति के लंबे वर्चस्व को चुनौती दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्यपाल क्या फैसला लेते हैं और क्या विजय विधानसभा में बहुमत साबित कर पाएंगे।

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