व्हाटअप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करे 👉
---Advertisement---

721 साल बाद भोजशाला पहुंचे CM मोहन यादव, मां वाग्देवी को लगा छप्पन भोग

By Neha
On: Monday, May 25, 2026 5:00 PM
721 साल बाद भोजशाला पहुंचे CM मोहन यादव, मां वाग्देवी को लगा छप्पन भोग
---Advertisement---

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला एक बार फिर देशभर में चर्चा का केंद्र बन गई है। हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव भोजशाला पहुंचे और मां वाग्देवी की विधि-विधान से पूजा की। बताया जा रहा है कि 721 साल बाद ऐसा मौका आया जब किसी मुख्यमंत्री ने भोजशाला मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान सकल हिंदू समाज की ओर से मां वाग्देवी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। भोजशाला मंदिर के पूजारियों ने मुख्यमंत्री को मां वाग्देवी का प्रतीक चिह्न भी भेंट किया। पूजा के बाद सीएम मोहन यादव ने कहा कि अदालत के फैसले ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के सनातन समाज के लिए ऐतिहासिक पल है। मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि मां वाग्देवी की असली प्रतिमा को लंदन से वापस लाने की हर संभव कोशिश की जाएगी।

ब्रिटिश म्यूजियम से प्रतिमा लाने की तैयारी ने बढ़ाई उम्मीदें

भोजशाला से जुड़ी सबसे बड़ी भावनात्मक बात मां वाग्देवी की उस मूल प्रतिमा को लेकर है जो फिलहाल ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की दिशा में गंभीर प्रयास करेगी। इस बयान के बाद मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने जोरदार जयकारे लगाए। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सनातन संस्कृति और शिक्षा का प्रतीक बन चुका है। इसी वजह से यहां “सरस्वती लोक” बनाने की मांग भी तेज हो गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस समेत कई संगठनों ने भोजशाला क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित करने और संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि जिस तरह अयोध्या को भव्य रूप दिया गया उसी तरह भोजशाला को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बनाया जाना चाहिए। इससे धार जिले को नई पहचान और रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला भोजशाला का पूरा स्वरूप

हाल ही में हाईकोर्ट ने भोजशाला को हिंदू मंदिर मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया था। इसके बाद यहां नियमित पूजा-पाठ शुरू हो चुका है और अब नमाज की अनुमति समाप्त कर दी गई है। पहले केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को पूजा की इजाजत मिलती थी जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था। लेकिन अब सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजाना पूजा की जा रही है। इस फैसले के बाद हिंदू समाज में खुशी की लहर है। लोगों का कहना है कि साढ़े सात सौ साल लंबे संघर्ष के बाद सनातन पक्ष को न्याय मिला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के भोजशाला पहुंचने को भी लोग ऐतिहासिक क्षण बता रहे हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी भोजशाला की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई लोग इसे भारतीय संस्कृति और परंपरा की बड़ी जीत बता रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष, फिर बढ़ सकता है विवाद

भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मुस्लिम पक्ष चाहता है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI द्वारा वर्ष 2003 में तय की गई पुरानी व्यवस्था फिर से लागू हो। उस व्यवस्था के तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी जाती थी। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला उनके धार्मिक अधिकारों को प्रभावित करता है। दूसरी तरफ हिंदू संगठन इस फैसले को अंतिम सत्य मानते हुए भोजशाला को पूरी तरह सनातन संस्कृति का केंद्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तर पर यह मामला बेहद संवेदनशील बन चुका है। आने वाले दिनों में भोजशाला को लेकर देशभर में और अधिक चर्चा और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---