भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi गुरुवार 21 मई की सुबह पांच देशों की सफल कूटनीतिक यात्रा पूरी कर नई दिल्ली लौट आए। इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात यूएई नीदरलैंड स्वीडन नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा तकनीकी सहयोग जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति और रक्षा साझेदारी को मजबूत करना था। यह दौरा भारत के वैश्विक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है क्योंकि हर देश के साथ महत्वपूर्ण समझौते और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया गया।

यूएई यात्रा में ऊर्जा और निवेश पर बड़ा समझौता
पीएम मोदी की सबसे अहम शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात से हुई जहां अबू धाबी में उनका भव्य स्वागत किया गया। यहां भारत और यूएई ने रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाते हुए स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का योगदान और एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी समझौता हुआ। यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश पैकेज की घोषणा की जिससे आर्थिक संबंधों को बड़ी मजबूती मिली। दोनों देशों ने होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही को भी समर्थन दिया जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
यूरोप में तकनीक और संस्कृति के नए द्वार खुले
नीदरलैंड और स्वीडन की यात्रा में भारत को तकनीकी और सांस्कृतिक स्तर पर बड़ी उपलब्धियां मिलीं। नीदरलैंड में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया गया और 11वीं सदी की चोल साम्राज्य की ऐतिहासिक ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं। इसके साथ ही ASML और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करने पर अहम समझौता हुआ। स्वीडन में भारत और स्वीडन ने संयुक्त नवाचार साझेदारी के दूसरे चरण की शुरुआत की और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी कॉरिडोर विकसित करने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया।
नॉर्वे और इटली में ग्रीन साझेदारी और रणनीतिक सहयोग
नॉर्वे की यात्रा में भारत को ग्रीन टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां मिलीं। दोनों देशों ने ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की और 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें ग्रीन हाइड्रोजन पवन ऊर्जा कार्बन कैप्चर और पोर्ट डेवलपमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा इसरो और नॉर्वे के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान को लेकर भी समझौता हुआ। यात्रा के अंतिम पड़ाव इटली में प्रधानमंत्री ने Giorgia Meloni से मुलाकात की जहां व्यापार निवेश रक्षा और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इस पूरी यात्रा ने भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत कर दिया है और आने वाले समय में इसके बड़े परिणाम देखने को मिल सकते हैं।






