उत्तर प्रदेश की 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले को लेकर एक बार फिर राजधानी लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। बुधवार को सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी विधानसभा का घेराव करने पहुंचे, जहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी गले में झाड़ू और मटकी लटकाकर पहुंचे, जिससे यह आंदोलन और अधिक प्रतीकात्मक और आक्रोशपूर्ण नजर आया। प्रशासन ने हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया।

अभ्यर्थियों के गंभीर आरोप और आरक्षण विवाद
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार दलित और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ न्याय नहीं कर रही है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही है, क्योंकि वकील तक नियुक्त नहीं किया गया है। अभ्यर्थियों ने इसे आरक्षण से जुड़े “महाघोटाले” की संज्ञा दी है और पिछले तीन वर्षों से लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई और आंदोलन का बढ़ता तनाव
विधानसभा का घेराव करने पहुंचे अभ्यर्थियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और बाद में इको गार्डन भेज दिया गया। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया। दूसरी ओर अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है और कई जिलों में आंदोलनकारियों को हाउस अरेस्ट किया जा रहा है, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया है।
कोर्ट के आदेश के बाद भी अटका मामला
यह विवाद वर्ष 2020 और 2022 की चयन सूचियों को लेकर शुरू हुआ था, जिन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि 2019 की परीक्षा के आधार पर नई सूची जारी की जाए, लेकिन मामला अब तक लंबित है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की निष्क्रियता के कारण यह मुद्दा वर्षों से अटका हुआ है और अब वे सुप्रीम कोर्ट में भी लगातार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।








