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महाराष्ट्र का ऐतिहासिक निर्णय: 56 लाख किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति, ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान ऋणमुक्ति योजना’ का आगाज़

On: Thursday, June 25, 2026 11:50 PM
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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूती देने और विषम परिस्थितियों में संघर्ष कर रहे किसानों को बड़ी राहत देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान ऋणमुक्ति योजना-2026’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। यह योजना न केवल किसानों के कंधों से कर्ज का बोझ कम करेगी, बल्कि उन्हें भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
स्थायी समाधान और लोककल्याणकारी दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एवं ‘मित्र’ (MITRA) की उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद तैयार की गई यह योजना पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर के लोककल्याणकारी आदर्शों को समर्पित है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि कृषि और जल संरक्षण के प्रति उनके समर्पण का सम्मान करते हुए, किसानों को स्थायी राहत प्रदान करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस योजना का उद्देश्य केवल कर्ज माफ करना नहीं, बल्कि किसानों को भविष्य में पुनः ऋण के दुष्चक्र में फंसने से बचाना है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं और प्रावधान

यह योजना अपनी व्यापकता और किसानों के प्रति संवेदनशीलता के लिए जानी जाएगी। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • ऋणमाफी का दायरा: पात्र किसानों के 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए अल्पकालीन फसल ऋण (मूलधन एवं ब्याज सहित) को माफ किया जाएगा। सरकार इस मद में 2 लाख रुपये तक की ऋणमुक्ति प्रदान करेगी।
  • व्यापक सुधार और लचीलापन: पिछली योजनाओं की विसंगतियों को दूर करते हुए, सरकार ने एक महत्वपूर्ण सुधार किया है। यदि किसी किसान का बकाया ऋण निर्धारित सीमा से अधिक है, तो वह अतिरिक्त राशि स्वयं जमा कर सरकार द्वारा दी जाने वाली 2 लाख रुपये की ऋणमुक्ति का लाभ उठा सकेगा।
  • अनुशासित किसानों के लिए सम्मान: ऋण चुकाने की अनुशासित परंपरा को बढ़ावा देने के लिए, नियमानुसार समय पर ऋण भुगतान करने वाले किसानों को 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन लाभ दिया जाएगा।
  • वन टाइम सेटलमेंट (OTS): जिन किसानों का ऋण 2 लाख रुपये से अधिक है, उनके लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ का विकल्प दिया गया है। ऐसे किसान 31 मार्च 2027 तक शेष राशि जमा कर अपने खातों को नियमित कर सकेंगे। पारदर्शिता का मानक: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन

योजना की संपूर्ण प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन और पारदर्शी रखी गई है। इसमें आधार प्रमाणीकरण की अनिवार्यता सुनिश्चित की गई है ताकि लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुँचे।

  • पात्रता: यह योजना राष्ट्रीयकृत, निजी, ग्रामीण, जिला सहकारी बैंकों तथा प्राथमिक कृषि साख समितियों से लिए गए फसल ऋणों पर लागू होगी।
  • अपात्रता: सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता बनाए रखने हेतु वर्तमान एवं पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक, स्थानीय निकायों के सदस्य, आयकर दाता, 25 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले सरकारी/अर्ध-सरकारी कर्मचारी और उच्च पेंशनभोगी इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं। आंकड़ों में योजना का विस्तार कुल लाभान्वित: लगभग 56 लाख किसान।
    वित्तीय प्रावधान: राज्य सरकार द्वारा लगभग 36 हजार 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
    योजना का विश्लेषणात्मक पक्ष
    इस योजना का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि यह केवल एक राहत पैकेज नहीं, बल्कि राज्य की कृषि नीति में एक संरचनात्मक बदलाव (Structural Shift) है। पूर्व की योजनाओं की तुलना में इसमें ‘स्व-योगदान’ और ‘समयबद्धता’ को प्राथमिकता देकर सरकार ने किसानों की जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को जोड़ा है। 36,500 करोड़ रुपये का यह विशाल बजट ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह को बढ़ाएगा, जिससे आगामी कृषि सत्रों में निवेश क्षमता में वृद्धि होने की संभावना है। यह पहल न केवल किसानों के खोए हुए आत्मविश्वास को पुनः स्थापित करेगी, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और गति प्रदान करते हुए दीर्घकालिक स्थिरता की आधारशिला रखेगी।

(इनपुट: विभागीय संपर्क अधिकारी, काशीबाई थोरात)

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