भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका राज्यसभा का छह वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका था और पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया। इसके बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें केंद्रीय मंत्री पद छोड़ना पड़ा। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे हैं जॉर्ज कुरियन
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन केरल के कोट्टायम के निवासी हैं और पेशे से वकील हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के गठन काल यानी 1980 से ही संगठन से जुड़े रहे हैं। पार्टी में उन्होंने राज्य महासचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। टीवी डिबेट्स और राजनीतिक कार्यक्रमों में भी वे बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरों के दौरान वे अक्सर उनके भाषणों का मलयालम भाषा में अनुवाद करते नजर आते थे।
2024 में बने थे केंद्रीय मंत्री
जॉर्ज कुरियन को वर्ष 2024 में मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों ने उस समय इसे बीजेपी की केरल में संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने और ईसाई समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा था। कुरियन सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े रहे हैं, जो केरल के प्रमुख ईसाई समुदायों में गिना जाता है। उनके मंत्री बनने को दक्षिण भारत में पार्टी के विस्तार के प्रयासों से भी जोड़कर देखा गया था।
राज्यसभा टिकट नहीं मिलने से बढ़ी चर्चा
जॉर्ज कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे। इस बार बीजेपी ने उनकी जगह तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा भेजने का फैसला किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कुरियन को अंतिम समय तक दोबारा नामांकन न मिलने की जानकारी नहीं थी। उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद वे भी इस फैसले से आश्चर्यचकित बताए गए। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केरल में अपेक्षित चुनावी प्रदर्शन न होने के कारण पार्टी नेतृत्व ने नए चेहरों को मौका देने का फैसला किया।
चुनावी राजनीति में भी रहे सक्रिय
जॉर्ज कुरियन ने 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में पुठुप्पल्ली सीट से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री Oommen Chandy से हुआ था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता O. Rajagopal के साथ भी काम कर चुके हैं और उनके केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान विशेष कार्याधिकारी (OSD) की भूमिका निभा चुके हैं।








