उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बार फिर पोस्टर पॉलिटिक्स ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। सोमवार सुबह शहर के कई प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए। इन पोस्टरों में अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर जातिवाद को बढ़ावा देने तथा सरकारी नौकरियों और प्रशासनिक नियुक्तियों में पक्षपात करने के आरोप लगाए गए हैं। पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
पोस्टरों में लगाए गए तीखे आरोप
लखनऊ में लगाए गए इन पोस्टरों में सपा के चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ और लाल टोपी का जिक्र करते हुए तीखे राजनीतिक संदेश लिखे गए हैं। पोस्टरों में लिखा गया है, “लाल टोपी साइकिल निशान, यादववाद इनकी पहचान” और “अंधेर नगरी अखिलेश राजा, यादववाद से सारी नौकरी खाजा”। इन नारों के जरिए समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर यादव समुदाय को प्राथमिकता देने और प्रशासनिक व्यवस्था में पक्षपात करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि पोस्टरों पर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, जिससे इनके पीछे की वास्तविक पहचान फिलहाल सामने नहीं आ सकी है।
सपा की ओर से नहीं आई कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया
पोस्टर लगाए जाने के बाद अभी तक समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए इस तरह की पोस्टरबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से भी अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पोस्टर लगाने वालों की पहचान की गई है या नहीं।
पहले भी विवादों में रह चुकी है पोस्टर राजनीति
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को लेकर विवादित पोस्टर लगाए गए हों। इससे पहले मई महीने में शाहजहांपुर में भी अखिलेश यादव के खिलाफ कई बड़े होर्डिंग्स लगाए गए थे। उन पोस्टरों में उन्हें महिला विरोधी बताया गया था और उन पर कई तीखी टिप्पणियां की गई थीं। उस समय समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए पोस्टरों को फाड़ दिया था। वहीं अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए भाजपा पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया था। अब एक बार फिर लखनऊ में सामने आए इन पोस्टरों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।








