पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक मजबूत पकड़ रखने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समय अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजरती नजर आ रही हैं। लगातार संगठन में बढ़ती अंदरूनी खींचतान और नेताओं की बगावत ने तृणमूल कांग्रेस की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी के कई वरिष्ठ चेहरे अब दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच पार्टी से निष्कासित किए गए ऋतब्रत बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए 58 विधायकों के समर्थन का दावा कर दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में नया समीकरण बनता दिख रहा है।

58 विधायकों के साथ विधानसभा पहुंचे ऋतब्रत
पार्टी से निष्कासन के कुछ ही दिनों बाद बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी 58 विधायकों के साथ विधानसभा पहुंचे, जहां उन्होंने खुद को विपक्ष के नेता यानी LoP घोषित करने की मांग रखी। उनके इस दावे ने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। स्पीकर ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी, जिससे TMC को बड़ा झटका लगा। कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले ऋतब्रत अब खुलकर बगावत के रास्ते पर हैं और यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहराते संकट की ओर इशारा कर रहा है।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
ऋतब्रत बनर्जी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र नेता के रूप में की थी। कोलकाता के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने CPI(M) के छात्र संगठन SFI के जरिए राजनीति में कदम रखा और बहुत कम उम्र में संगठन के अखिल भारतीय महासचिव बन गए। सीताराम येचुरी के करीबी माने जाने वाले ऋतब्रत ने तेज़ी से पार्टी में अपनी जगह बनाई और 34 साल की उम्र में 2014 में राज्यसभा सांसद बन गए। हालांकि 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों और जीवनशैली को लेकर उन्हें CPI(M) से निष्कासित कर दिया गया।
TMC में एंट्री और फिर लगातार विवाद
CPI(M) से निकाले जाने के बाद 2018 में ऋतब्रत ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और ट्रेड यूनियन विंग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। बाद में 2024 में उन्हें राज्यसभा सांसद भी बनाया गया और 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने उलुबेरिया पुरबा सीट से जीत दर्ज की। लेकिन इसी दौरान उनके राजनीतिक रिश्तों और कुछ विवादों को लेकर सवाल उठने लगे। विपक्षी नेताओं से मुलाकात और पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी ने उनकी स्थिति को कमजोर किया और अंततः 1 जून को उन्हें TMC से निष्कासित कर दिया गया।
पार्टी टूटने की आशंका और आगे की राजनीतिक जंग
ऋतब्रत बनर्जी के दावे और 58 विधायकों के समर्थन ने TMC की आंतरिक स्थिति को और जटिल बना दिया है। ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए पार्टी टूटने की साजिश का आरोप लगाया है और कहा है कि इसके पीछे दिल्ली स्तर की राजनीति भी शामिल हो सकती है। वहीं ऋतब्रत का कहना है कि वह ममता बनर्जी के साथ हैं लेकिन पार्टी नेतृत्व के कुछ फैसलों से असंतुष्ट हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वह सदन में भाजपा का कड़ा मुकाबला करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।








