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म्यांमार ने भारत को दिया बड़ा भरोसा, सुरक्षा पर हुआ अहम समझौता

By Neha
On: Tuesday, June 2, 2026 8:31 AM
म्यांमार ने भारत को दिया बड़ा भरोसा, सुरक्षा पर हुआ अहम समझौता
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भारत और म्यांमार के रिश्तों को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भरोसा दिलाया है कि उनकी धरती का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। पांच दिवसीय भारत दौरे पर आए राष्ट्रपति ह्लाइंग ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में व्यापार। रक्षा। ऊर्जा। सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि पारस्परिक विश्वास और सहयोग के आधार पर भविष्य की साझेदारी को और मजबूत बनाया जाएगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब म्यांमार में हाल ही में राजनीतिक बदलाव हुए हैं और राष्ट्रपति बनने के बाद ह्लाइंग की यह पहली बड़ी विदेश यात्राओं में से एक मानी जा रही है। इस मुलाकात को भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीमा सुरक्षा और उग्रवाद पर हुई गंभीर चर्चा

बैठक के दौरान भारत ने सीमा पार सक्रिय उग्रवादी संगठनों और उनके प्रभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार की सीमा से संचालित होने वाले सशस्त्र समूहों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई बार इन गतिविधियों का असर भारतीय सीमा के निकट रहने वाले लोगों पर पड़ता है। सीमा क्षेत्रों में अस्थिरता और शरणार्थियों की आवाजाही जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इसके जवाब में म्यांमार के राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार भारत की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से समझती है और किसी भी आतंकवादी या उग्रवादी गतिविधि को समर्थन नहीं देगी। दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन को मजबूत करने। बाड़बंदी कार्यों को आगे बढ़ाने और निर्धारित प्रवेश द्वारों तथा जांच चौकियों को विकसित करने पर भी सहमति जताई। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।

विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग पर जोर

भारत और म्यांमार ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशेष रूप से कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को दोनों देशों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताया। इन परियोजनाओं के पूरा होने से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने में मदद मिलेगी। बैठक में स्वास्थ्य। शिक्षा। ऊर्जा। निवेश और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने माना कि आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने से न केवल द्विपक्षीय संबंध बेहतर होंगे बल्कि पूरे क्षेत्र में विकास और समृद्धि का नया मार्ग खुलेगा। भारत ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया जबकि म्यांमार ने भी भारत के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

राजनीतिक हालात और भविष्य की साझेदारी पर नजर

बैठक के दौरान म्यांमार की आंतरिक स्थिति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में शांति प्रक्रिया और सभी पक्षों के बीच संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया कि वह म्यांमार के आंतरिक राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता बल्कि स्थायी शांति और समावेशी समाधान का समर्थन करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति ह्लाइंग से मुलाकात कर सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति के साथ कई मंत्री। वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति भी भारत आए हैं। अब उनकी मुंबई यात्रा पर भी नजरें टिकी हैं जहां व्यापार और निवेश से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने की संभावना है। कुल मिलाकर यह दौरा भारत और म्यांमार के रिश्तों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है और इससे दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है।

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