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पालघर: ‘बहाडोली जामुन प्रोजेक्ट’ बदलेगा किसानों की किस्मत, वन विभाग की अनूठी पहल

On: Sunday, May 31, 2026 4:28 PM
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पालघर | खबरदीप जनमंच
महाराष्ट्र के पालघर जिले में जामुन उत्पादक किसानों के दिन अब बहुरने वाले हैं। वन विभाग ने बहाडोली गाँव के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी “बहाडोली जामुन प्रसंस्करण (प्रॉसेसिंग) उद्योग” परियोजना को मंजूरी दे दी है। राज्य के वन मंत्री और पालघर के पालक मंत्री गणेश नाईक के विशेष प्रयासों से शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट का मकसद किसानों को बिचौलियों से बचाकर सीधे एक बड़ा बाजार देना और गाँव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
इस सिलसिले में बहाडोली ग्राम पंचायत कार्यालय में एक विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया था। हालांकि, कोरम (न्यूनतम उपस्थिति) पूरा न होने के कारण बैठक को स्थगित करना पड़ा, लेकिन मौके पर मौजूद पालघर के वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) सुशील नांदवते ने ग्रामीणों को इस पूरे प्रोजेक्ट की बारीकियों और इससे होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से समझाया।

क्यों पड़ी इस प्रोजेक्ट की जरूरत?

बहाडोली गाँव के करीब 60 से 70 फीसदी किसान जामुन की खेती से जुड़े हैं। सीजन की शुरुआत में तो इन्हें जामुन के अच्छे दाम मिल जाते हैं, लेकिन जैसे ही सीजन खत्म होने लगता है, बाजार में मंदी आ जाती है। इसके अलावा मौसम की मार और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। इसी समस्या का पक्का इलाज करने के लिए वन विभाग इस प्रोजेक्ट के जरिए जामुन का ‘वैल्यू एडिशन’ (जामुन से अन्य उत्पाद बनाना) करने जा रहा है।

किसानों को सीधे फायदा और युवाओं को रोजगार

सीधी खरीद और तुरंत भुगतान: इस प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग सीधे किसानों से जामुन खरीदेगा। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और किसानों के पैसे का भुगतान बिना किसी देरी के तुरंत किया जाएगा।
मिलेगा रोजगार: करीब 6000 से 8000 वर्ग फीट के इलाके में बनने वाले इस प्लांट के निर्माण और संचालन के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतरीन मौके मिलेंगे, जिससे गाँव में बेरोजगारी कम होगी।
हाईटेक मशीनें और एक्सपर्ट्स: इस आधुनिक प्लांट में जामुन की छंटनी (ग्रेडिंग), प्रॉसेसिंग, पैकिंग और स्टोरेज के लिए अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। काम को बेहतर ढंग से चलाने के लिए कंपनी अपने खर्च पर टेक्निकल एक्सपर्ट्स की नियुक्ति भी करेगी।

शुरुआती 5 साल प्रोफेशनल हाथों में कमान

इस उद्योग को पूरी तरह से व्यावसायिक और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरुआती 5 साल इसका मैनेजमेंट एक अनुभवी और योग्य संस्था को सौंपा जाएगा। यह संस्था फूड लाइसेंस, प्रिजर्वेटिव्स, कंपनी एक्ट, लेबर लॉ और इंटरनेशनल मार्केटिंग जैसे तकनीकी पहलुओं को संभालेगी। जब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा और ‘संयुक्त वन प्रबंधन समिति’ (JFMC) इसे संभालने के काबिल हो जाएगी, तब मैनेजमेंट की जिम्मेदारी स्थानीय समिति को सौंपने पर विचार होगा।

पाई-पाई का हिसाब और गाँव का विकास

प्रोजेक्ट की पूरी पारदर्शिता के लिए ग्रामसभा एक स्वतंत्र निगरानी समिति बनाएगी। हर महीने इस उद्योग की प्रोग्रेस रिपोर्ट और पैसों का हिसाब JFMC समिति को दिया जाएगा, और साल में एक बार ग्रामसभा के सामने पूरी लिखित रिपोर्ट रखी जाएगी।
सालाना वित्तीय वर्ष के अंत में जो भी शुद्ध मुनाफा होगा, उसका एक तय हिस्सा सरकारी नियमों के अनुसार JFMC समिति को मिलेगा। इस पैसे का इस्तेमाल ग्रामसभा और ग्राम पंचायत के जरिए गाँव में सड़क, पानी, बिजली जैसे विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।

आभार और सहयोग का भरोसा

ग्रामसभा में विस्तार से जानकारी देने के लिए उपसरपंच राहुल पाटिल ने ग्राम पंचायत की तरफ से वन परिक्षेत्र अधिकारी सुशील नांदवते, वनपाल और वनरक्षकों का आभार जताया। उन्होंने भरोसा दिया कि ग्राम पंचायत और सभी ग्रामीण मिलकर इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में पूरा सहयोग करेंगे।

“बहाडोली जामुन प्रोजेक्ट से किसानों को पक्का बाजार और युवाओं को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही गाँव की आर्थिक उन्नति को एक नई दिशा मिलेगी। ग्रामीणों के साथ मिलकर हम इस प्रोजेक्ट को पूरे महाराष्ट्र के लिए ‘मॉडल ग्रामीण उद्योग’ के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सुशील नांदवते, वन परिक्षेत्र अधिकारी (क्षेत्रीय), पालघर

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