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पालघर के लोगों ने मिलकर बनाए 30,000 ‘बीजगोले’ (सीड बॉल); महाराष्ट्र को हरा-भरा बनाने के लिए बड़ी पहल

On: Sunday, May 31, 2026 4:21 PM
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पालघर, 30 मई 2026

महाराष्ट्र को हरा-भरा और सुंदर बनाने के लिए पालघर के नागरिकों ने एक अनोखा और बड़ा कदम उठाया है। पालघर के सरकारी वन विभाग (क्षेत्रीय) की ओर से “पेड़ लगाने की जानकारी और बीजगोले (सीड बॉल) बनाने का कार्यक्रम” बहुत ही धूमधाम और उत्साह के साथ पूरा हुआ।
यह पूरा कार्यक्रम पालघर के वन अधिकारी (वन परिक्षेत्र अधिकारी) श्री सुशील नांदवटे की देखरेख में आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम को करने के दो मुख्य उद्देश्य थे:

  1. आम जनता खुद अपनी इच्छा से आगे आए और पेड़ लगाने की जिम्मेदारी संभाले।
  2. हमारे पर्यावरण (प्रकृति) का जो नुकसान हुआ है, उसे ठीक किया जा सके और साल 2047 तक देश में 300 करोड़ पेड़ लगाने के बड़े सपने को पूरा किया जा सके। क्या होते हैं बीजगोले (सीड बॉल)
    और इन्हें कैसे बनाया गया?
    कम पढ़े-लिखे भाई-बहनों को समझाने के लिए बता दें कि बीजगोला (सीड बॉल) मिट्टी और खाद का एक छोटा सा गोला होता है, जिसके अंदर किसी पेड़ का बीज रख दिया जाता है। इसे जमीन पर फेंकने या रखने से बारिश का पानी मिलते ही इसमें से पौधा निकल आता है। इसके लिए गड्ढा खोदने की जरूरत नहीं पड़ती।
    इस कार्यक्रम में हमारे जंगलों के कई मुख्य और फायदेमंद पेड़ों के बीज इकट्ठे किए गए थे, जैसे — सागौन, बहेड़ा, हरड़, आम, जामुन, खैर, बांस, सुरंग, हापुस आम, कदम, पीपल और गूलर।
    बीजगोला बनाने का सही और वैज्ञानिक तरीका (फार्मूला): 50 किलो (या 50%) साधारण मिट्टी ली गई।
    45 किलो (या 45%) गोबर की सूखी खाद मिलाई गई।
    5 किलो (या 5%) बारीक छनी हुई मिट्टी और कोकोपीट (नारियल के छिलके का चूरा) मिलाया गया।
    इन सब चीजों को आपस में मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू जैसे गोले बनाए गए और उनके बीच में बीज डाल दिए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरीके से बनाए गए गोलों में से 70 से 80 प्रतिशत पौधों के जीवित रहने और उगने की गारंटी होती है। बच्चों से लेकर बड़ों तक, सबने मिलकर निभाया फर्ज

इस कार्यक्रम में केवल सरकारी बाबू ही नहीं, बल्कि गाँव-शहर के आम लोग, स्कूल-कॉलेज के छात्र, जंगलों की रक्षा करने वाले वनपाल और वनरक्षक, साँपों को बचाने वाली ‘सर्पमित्र संस्था’ और कई सामाजिक संस्थाओं (NGO) के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
वहाँ आए सभी लोगों के अलग-अलग ग्रुप (समूह) बनाए गए और सबको अलग-अलग पेड़ों के बीज दिए गए। सबसे पहले अधिकारियों ने सबको बीजगोला बनाने का तरीका सिखाया। इसके बाद सबने मिलकर 30,000 बीजगोले तैयार कर दिए।
ये सारे बीजगोले आने वाले 2026 के इसी मानसून (बरसात के मौसम) में जंगलों, खाली पड़ी सरकारी जमीनों, पहाड़ों और बंजर जगहों पर डाल दिए जाएंगे, ताकि बारिश होते ही वहाँ नए पेड़ उग आएं।

अधिकारियों का संदेश: “अकेली सरकार कुछ नहीं कर सकती”

पालघर के वन अधिकारी श्री सुशील नांदवटे ने लोगों को समझाते हुए कहा:

“बीजगोला बनाना सिर्फ एक खेल या काम नहीं है, बल्कि यह धरती को बचाने के लिए सब लोगों को एक साथ जोड़ने का जरिया है। अगर देश का हर नागरिक कम से कम एक पौधा लगाए और उसे अपने बच्चे की तरह पाले, तो हमारा महाराष्ट्र पूरी तरह हरा-भरा हो जाएगा।”

उन्होंने आगे बताया कि सरकारी नियम (राष्ट्रीय वन नीति 1988) के मुताबिक, देश की कुल जमीन के
33 प्रतिशत (यानी करीब एक-तिहाई) हिस्से पर जंगल होना जरूरी है। लेकिन यह काम सिर्फ वन विभाग अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए आम जनता, युवाओं, छात्रों, निजी कंपनियों और सामाजिक संस्थाओं को खुद आगे आकर एक बड़ा आंदोलन चलाना होगा।

महिलाओं ने जीती प्रतियोगिता, मिला सम्मान

इस कार्यक्रम को मजेदार बनाने के लिए एक प्रतियोगिता (कंपटीशन) भी रखी गई थी। यह देखने के लिए कि किस ग्रुप ने सबसे अच्छे और ज्यादा गोले बनाए हैं, कुछ निष्पक्ष लोगों को जज बनाया गया।
विजेता (पहला नंबर): श्रीमती भारती चव्हाण और श्रीमती भोये के ग्रुप ने बाजी मारी। इस ग्रुप ने सबसे ज्यादा 3,450 बीजगोले बनाए। विजेता महिलाओं को इनाम देकर सम्मानित किया गया।

इस साल का बड़ा लक्ष्य: 3 लाख बीजगोले

अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे साल में पालघर वन विभाग का लक्ष्य 3 लाख बीजगोले बनाने का है। इस बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी — सर्वश्री पिंपले, घुटे, भारती चव्हाण, निकिता गवली, वृषाली वरठा, सुगरे, भोये, धरमले, कांबले, कावडी, हमरे और घेगड ने पूरी जान लगाने का वादा किया है।
कार्यक्रम के आखिर में वनपाल श्री राजू पिंपले ने वहाँ आए सभी मेहमानों और जनता का हाथ जोड़कर धन्यवाद (आभार) जताया।
अगला कार्यक्रम: 5 जून 2026 (विश्व पर्यावरण दिवस)
अगर आप इस बार शामिल नहीं हो पाए, तो निराश न हों। अगला कार्यक्रम 5 जून 2026 को सुबह 11:00 बजे आयोजित किया जा रहा है।

स्थान (पता): वन परिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय, पालघर (मजीद के सामने, घोलविरा)
संपर्क करें: यदि आपके मन में कोई सवाल हो या आप शामिल होना चाहते हैं, तो वनपाल श्री राजू पिंपले या वनरक्षक श्री प्रदीप कांबले से संपर्क कर सकते हैं।
पालघर के वन अधिकारी श्री सुशील नांदवटे ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 5 जून को भारी संख्या में आकर इस पुण्य के काम में अपना योगदान दें।

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