केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 12वीं कक्षा के री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में सामने आई तकनीकी समस्याओं ने छात्रों और अभिभावकों को परेशान कर दिया है। देशभर से हजारों छात्रों ने शिकायत की है कि री-इवैल्यूएशन फॉर्म भरने के दौरान बोर्ड का आधिकारिक पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया बाधित हो रही है। इस गंभीर स्थिति पर शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत संज्ञान लिया है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CBSE से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही उन्होंने बोर्ड को निर्देश दिया है कि छात्रों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए ताकि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो।

री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया शुरू होते ही वेबसाइट पर बढ़ा भारी दबाव
CBSE ने 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद री-इवैल्यूएशन और कॉपियों की री-चेकिंग की प्रक्रिया शुरू की थी। 19 मई से शुरू हुई इस ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत वे छात्र जिन्होंने अपने अंकों पर असंतोष जताया था, वे अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए आवेदन कर रहे हैं। लेकिन प्रक्रिया शुरू होते ही वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक के कारण तकनीकी दिक्कतें सामने आने लगीं। कई छात्रों का कहना है कि वे बार-बार लॉगिन करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पोर्टल खुल ही नहीं रहा। इस स्थिति ने छात्रों में चिंता और असंतोष दोनों बढ़ा दिए हैं, क्योंकि आवेदन की समयसीमा भी सीमित है।
दो चरणों में पूरी हो रही री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया
CBSE ने इस वर्ष 12वीं री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को दो अलग-अलग चरणों में विभाजित किया है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सके। पहले चरण में छात्रों को अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन करना होता है। इसके बाद दूसरे चरण में छात्र उत्तरों की वेरिफिकेशन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहले चरण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है जबकि दूसरे चरण के लिए आवेदन 26 मई से 29 मई तक किए जाएंगे। बोर्ड का दावा है कि यह नई व्यवस्था छात्रों को अपने परिणाम को बेहतर तरीके से समझने का अवसर देती है।
छात्रों की चिंता बढ़ी, मंत्रालय ने CBSE को तुरंत सुधार के निर्देश दिए
तकनीकी खामियों और पोर्टल क्रैश होने की घटनाओं के बीच छात्रों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कई अभिभावकों ने भी शिकायत की है कि समय पर आवेदन न कर पाने से उनके बच्चों का एकेडमिक भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसी गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से तत्काल कार्रवाई करने और सिस्टम को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए और पोर्टल को स्थिर बनाया जाए। अब सभी की नजर इस बात पर है कि बोर्ड कब तक इस तकनीकी संकट को दूर करता है और छात्रों को राहत मिलती है या नहीं।







