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सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा विस्तार, एनडीए गठबंधन में नया समीकरण सामने आया

By Neha
On: Thursday, May 7, 2026 1:37 PM
सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा विस्तार, एनडीए गठबंधन में नया समीकरण सामने आया
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बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला जब सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के व्यापक विस्तार के तहत कुल 31 नए मंत्रियों ने शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया गया, जहां राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी साफ नजर आया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पद की नई संरचना के तहत कई नए और पुराने चेहरों को शामिल किया गया, जिससे सरकार का राजनीतिक संतुलन और मजबूत करने की कोशिश की गई है। समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

निशांत कुमार समेत कई बड़े नेताओं को मिला मंत्रिमंडल में स्थान

इस विस्तार का सबसे बड़ा आकर्षण जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का मंत्री बनना रहा, जिनकी एंट्री को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। उनके साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, पूर्व मंत्री श्रवण कुमार और अशोक चौधरी को भी नई सरकार में शामिल किया गया है। यह मंत्रिमंडल एनडीए के सभी घटक दलों के संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि इस विस्तार का उद्देश्य प्रशासनिक अनुभव और युवा नेतृत्व का मिश्रण तैयार करना है, जिससे सरकार की कार्यक्षमता और तेज की जा सके।

PM मोदी और अमित शाह की मौजूदगी से बढ़ा राजनीतिक महत्व

इस शपथ ग्रहण समारोह की सबसे बड़ी खासियत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी रही, जिसने इसे राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक कार्यक्रम बना दिया। इसके अलावा जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार और एनडीए के अन्य वरिष्ठ नेता भी मंच पर मौजूद रहे। कुछ समय पहले ही बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ था जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और सम्राट चौधरी को नया नेतृत्व सौंपा गया था। इसी बदलाव के बाद यह पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार माना जा रहा है, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एनडीए गठबंधन में संतुलन साधने की कोशिश तेज

बिहार एनडीए में भाजपा, जेडीयू के अलावा चिराग पासवान की LJPRV, जीतन राम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की RLM भी शामिल हैं। इस नए मंत्रिमंडल में सभी सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है ताकि गठबंधन में संतुलन बना रहे। इससे पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी सरकार में छोटे सहयोगी दलों को भी उचित भागीदारी मिली थी। अब नए सत्ता समीकरण में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मंत्रिमंडल आने वाले समय में बिहार की राजनीति और विकास की दिशा को किस तरह प्रभावित करता है।

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