समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने आउटसोर्स और अंशकालिक श्रमिकों के अधिकारों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश आकस्मिक अवकाश चिकित्सीय अवकाश इंश्योरेंस और पीएफ जैसी सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से दी जाएं। मंत्री ने कहा कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर श्रमिक को सम्मानजनक और सुरक्षित कार्य वातावरण मिले। इसी दिशा में विभागीय अधिकारियों को सभी प्रक्रियाओं को तेज गति से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

अवकाश और कार्य घंटों को लेकर नए नियम लागू
नए नियमों के अनुसार अब किसी भी आउटसोर्स या अनुबंध श्रमिक से लगातार सात दिन तक काम नहीं लिया जा सकेगा। छह दिन लगातार काम के बाद एक दिन का सवैतनिक अवकाश देना अनिवार्य कर दिया गया है। कार्य के घंटे भी स्पष्ट रूप से आठ से नौ घंटे तक निर्धारित किए गए हैं। यदि किसी कर्मचारी से इससे अधिक समय तक कार्य लिया जाता है तो उसे ओवरटाइम भुगतान देना जरूरी होगा। इसके साथ ही हर कर्मचारी को वर्ष में दस आकस्मिक अवकाश और छह माह की सेवा पूरी होने पर पंद्रह दिन का चिकित्सीय अवकाश मिलेगा। महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश का नियम भी सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
आउटसोर्स सेवा निगम से बिचौलियों पर सख्त प्रहार
सरकार ने आउटसोर्स सेवाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया है जो एक अप्रैल से प्रभावी हो चुका है। इसके माध्यम से बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश की जा रही है ताकि श्रमिकों को उनका पूरा अधिकार सीधे मिल सके। न्यूनतम मजदूरी की दरें भी निर्धारित कर दी गई हैं जिसमें अकुशल श्रमिकों के लिए ग्यारह हजार रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए तेरह हजार पांच सौ रुपये तय किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे श्रमिकों का शोषण रुकेगा और उन्हें समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित होगा। साथ ही वेतन पर्ची और पहचान पत्र जैसी व्यवस्थाएं भी अनिवार्य कर दी गई हैं जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
श्रम संवाद में अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारी
भागीदारी प्रेक्षागृह में आयोजित श्रम संवाद कार्यक्रम के दौरान श्रम विभाग के अधिकारियों ने नए लेबर कोड्स की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू कराना है। कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत यूपी सिडको के चेयरमैन वाईपी सिंह उपाध्यक्ष अनुगम विश्वनाथ और निदेशक जनजाति कल्याण शिव प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने श्रमिक कल्याण को सरकार की प्राथमिकता बताया। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में इन सुधारों का असर सीधे श्रमिकों के जीवन स्तर पर दिखाई देगा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के नए आयाम मिलेंगे।








