बिहार विधान परिषद की दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 12 मई को मतदान निर्धारित किया गया है। इनमें एक सीट मंगल पांडेय के इस्तीफे के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी भोजपुर–बक्सर स्थानीय निकाय क्षेत्र से जुड़ी है। बीजेपी ने इस सीट पर सूर्य कुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं जेडीयू ने भोजपुर–बक्सर सीट से कन्हैया प्रसाद को मैदान में उतारा है। दोनों दलों के बीच यह मुकाबला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।

इस्तीफों के बाद खाली हुई सीटें, नए समीकरण बने
मंगल पांडेय सीवान विधानसभा सीट से 2025 में निर्वाचित हुए थे, जिसके बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसी तरह भोजपुर–बक्सर स्थानीय निकाय सीट राधाचरण शाह के इस्तीफे के बाद खाली हुई, क्योंकि वे संदेश विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इन इस्तीफों के कारण बनी रिक्तियों ने बिहार की राजनीतिक समीकरणों को फिर से सक्रिय कर दिया है और सभी दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
नीतीश कुमार की सीट पर भी उपचुनाव की तैयारी
सबसे बड़ा सवाल पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधान परिषद सीट को लेकर है, जिन्होंने 30 मार्च को इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल 2030 तक था, इसलिए यह सीट भी उपचुनाव के दायरे में आती है। नियमों के अनुसार किसी भी रिक्त सीट पर छह महीने के भीतर चुनाव कराना आवश्यक होता है। इसी वजह से माना जा रहा है कि नीतीश कुमार की सीट पर उपचुनाव अन्य खाली होने वाली सीटों के साथ ही कराया जा सकता है। इस फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
10 सीटों पर एक साथ चुनाव, NDA की स्थिति मजबूत
जानकारी के अनुसार 28 जून को विधान परिषद की 9 सीटें एक साथ खाली हो रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जेडीयू के भगवान सिंह कुशवाहा की सीटें भी शामिल हैं। ऐसे में जून में 9 सीटों पर चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव एक साथ हो सकता है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार एनडीए के पास बहुमत का आंकड़ा मजबूत है और उपचुनाव में भी उसकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है। वहीं गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर भी चर्चा जारी है, जिसमें कई दलों के लिए सीटें तय होने की बात सामने आ रही है।








