बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पास कर लिया। यह पहली बार है जब भाजपा के नेता ने सदन की अगुवाई करते हुए बहुमत साबित किया। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए के पास 201 विधायकों का समर्थन है, जिससे सरकार ने आसानी से अपना बहुमत साबित कर दिया। इस परिणाम को पहले से ही तय माना जा रहा था और विपक्ष ने भी इस पर कोई बड़ा संदेह नहीं जताया था।

तेजस्वी यादव का हमला, राजनीतिक अस्थिरता पर उठाए सवाल
फ्लोर टेस्ट के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले पांच वर्षों में पांच सरकारों का गठन हुआ है, जो राज्य की राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है। तेजस्वी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में “असली भाजपाई” नहीं हैं और कई नेता अन्य दलों से आए हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की संख्या कम जरूर है, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।
नीतीश कुमार के नेतृत्व और NDA की एकजुटता पर जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी सरकार नीतीश कुमार के सपनों के बिहार को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार उसी रास्ते पर चलेगी, जो नीतीश कुमार ने तय किया है। तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा जीतना ही असली राजनीति है और एनडीए को लगातार जनता का समर्थन मिलता रहा तो आने वाली पीढ़ियां भी सरकार चलाएंगी।
नई सरकार की संरचना और गठबंधन की मजबूती पर नजर
नई सरकार में जनता दल यूनाइटेड के केवल दो नेताओं विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। उन्होंने भी पहले ही विश्वास जताया था कि सरकार आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। बिहार में एनडीए गठबंधन में भाजपा के अलावा जेडीयू, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। पांच दलों का यह गठबंधन मजबूत स्थिति में है और पिछले विधानसभा चुनाव में भी इसे भारी सफलता मिली थी। इस फ्लोर टेस्ट के बाद अब सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं पर तेजी से काम करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।








