मेरठ के सकौती गांव में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण समारोह के बाद अचानक विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम के दौरान जब लोगों ने प्रतिमा के शिलालेख को देखा तो उसमें ‘जाट’ शब्द गायब पाया गया। इस बात से बिरादरी के लोगों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने इसे अपनी पहचान का अपमान बताया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और करीब 45 मिनट तक धरना प्रदर्शन चला। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन ने जानबूझकर यह शब्द हटाया है जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और माहौल गर्म हो गया।

राजनीतिक बयानबाजी और मंच से तीखे आरोप
इस विवाद ने जल्द ही राजनीतिक रूप ले लिया। नागौर से सांसद हनुमान बेनिवाल ने मंच से प्रदेश सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका इस मामले में संदिग्ध है और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कार्यक्रम में भीड़ ज्यादा होने के कारण अव्यवस्था भी देखने को मिली। इसी कारण पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान प्रतिमा का अनावरण किए बिना ही कार्यक्रम स्थल से लौट गए। इस घटनाक्रम ने पूरे आयोजन को विवाद और असंतोष के माहौल में बदल दिया।
प्रशासन का स्पष्टीकरण और 15 दिन की चेतावनी
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और सरधना के उपजिलाधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को संभालते हुए कहा कि ‘जाट’ शब्द वाला शिलापट्ट कहीं खो गया है और उसे जल्द ही खोजकर दोबारा लगाया जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए 10 दिन का समय मांगा था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी ने समुदाय की ओर से 15 दिन का समय दिया और चेतावनी दी कि अगर तय समय में नया शिलापट्ट नहीं लगाया गया तो 16वें दिन पंचायत बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस चेतावनी ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।
भगवंत मान के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
कार्यक्रम के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश को ‘विश्वगुरु’ बनना था लेकिन वर्तमान हालात कुछ और ही तस्वीर दिखाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की नीतियों पर बाहरी दबाव नजर आता है और आम लोगों की बुनियादी समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जहां दुनिया मंगल ग्रह तक पहुंचने की बात कर रही है वहीं भारत में अब भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर देश की किस्मत नहीं बदल सकते तो भाषण तो बदलना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है और यह विवाद अब सिर्फ सामाजिक नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।








संसद में हंगामा महिला आरक्षण 2023 कानून लागू होने पर उठे गंभीर सवाल