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हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित, अमृतपाल की संसद सदस्यता पर संकट

By Neha
On: Wednesday, March 25, 2026 1:42 PM
हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित, अमृतपाल की संसद सदस्यता पर संकट
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में मंगलवार 24 मार्च को सांसद अमृतपाल सिंह की संसद से लगातार अनुपस्थिति को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत को बताया गया कि अमृतपाल सिंह की अनुपस्थिति 59 बैठकों तक पहुंच चुकी है और यह संख्या अब 60 दिन के करीब है। यह मामला तब सामने आया जब अमृतपाल सिंह ने संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए अस्थायी रिहाई की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

60 बैठकों की अनुपस्थिति पर सीट जाने का खतरा

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने अदालत को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 104 के तहत यदि कोई सांसद लगातार 60 बैठकों तक अनुपस्थित रहता है तो उसकी सीट रिक्त घोषित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अमृतपाल की अनुपस्थिति 59 बैठकों तक पहुंच चुकी है और अब यह सीमा पूरी होने के कगार पर है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में एक समिति होती है जो अनुपस्थिति को माफ करने पर विचार करती है। यदि सांसद उचित कारणों के साथ आवेदन देता है तो समिति उसकी सिफारिश लोकसभा को भेज सकती है और आमतौर पर ऐसे मामलों में राहत दी जाती है।

आवेदन से मिल सकती है राहत, पहले भी मिली छूट

अदालत में यह भी बताया गया कि अमृतपाल सिंह अपनी अनुपस्थिति को माफ कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। एएसजी ने जानकारी दी कि इससे पहले भी उनकी अनुपस्थिति दो बार माफ की जा चुकी है। इस बार भी यदि वे उचित कारणों के साथ आवेदन देते हैं तो उन्हें राहत मिल सकती है। फिलहाल अमृतपाल सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। उनकी याचिका और संसद में भागीदारी को लेकर अब कोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

गिरफ्तारी और विवादों से जुड़ा पूरा मामला

अमृतपाल सिंह को 23 अप्रैल 2023 को मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था। वे ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख हैं और खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तर्ज पर स्थापित करने की कोशिश कर चुके हैं। फरवरी 2023 में अजनाला पुलिस थाने पर हुए हमले के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई थी। इस घटना में उनके समर्थकों ने पुलिस से झड़प की और हथियारों का प्रदर्शन किया था। बाद में अमृतपाल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। अप्रैल 2025 में उनकी हिरासत को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत बढ़ा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें लगातार विवादों और कानूनी चुनौतियों के केंद्र में बनाए रखा है।

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