रजरप्पा (रामगढ़) | 11 मार्च, 2026: झारखंड के सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ माँ छिन्नमस्तिका मंदिर, रजरप्पा में पिछले दिनों जो हुआ, उसने न केवल राज्य पुलिस की छवि को धूमिल किया है, बल्कि मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 8 मार्च (रविवार) को एक श्रद्धालु परिवार के साथ हुई मारपीट की घटना ने अब एक बड़े प्रशासनिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है।

क्या है पूरा मामला?
जमशेदपुर से अपनी माँ और पत्नी के साथ दर्शन करने आए एक युवक को मंदिर के निकासी द्वार (एग्जिट गेट) पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने बेरहमी से पीटा। वायरल हुए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खाकी वर्दी में तैनात चार-पांच जवान युवक को जमीन पर पटककर लात-घूसों से मार रहे हैं। इस दौरान जब उसकी पत्नी और वृद्ध माँ ने उसे बचाने की कोशिश की, तो उनके साथ भी अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई।
विवाद की जड़: ‘पैसे लेकर प्रवेश’ के आरोप
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि विवाद की असली वजह मंदिर में चल रहा ‘पैसे के बदले वीआईपी दर्शन’ का खेल है। आरोप है कि पुलिस और कुछ बिचौलिए मिलकर निकासी द्वार से पैसे लेकर लोगों को सीधे गर्भगृह तक पहुंचाते हैं। जब कतार में खड़े आम भक्तों ने इस भेदभाव का विरोध किया, तो पुलिस ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए हिंसा का सहारा लिया।
प्रशासनिक एक्शन: 4 पुलिसकर्मी निलंबित
मामले के तूल पकड़ते ही रामगढ़ एसपी अजय कुमार ने त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच के आधार पर मारपीट में शामिल झारखंड आर्म्ड पुलिस (JAP-4) के चार जवानों—श्याम लाल महतो, राधेश्याम कुजूर, बहादुर उरांव और जॉनसन सुरीन को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, ड्यूटी पर तैनात एक होमगार्ड को सेवा से मुक्त कर दिया गया है।
जवाबदेही पर सवाल
यह घटना केवल चंद पुलिसकर्मियों की अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं है। यह उन तमाम दावों की पोल खोलती है जहाँ धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा के नाम पर आम लोगों का शोषण किया जाता है। भक्तों का कहना है कि:
- अगर निकासी द्वार से प्रवेश वर्जित है, तो पैसे लेकर कुछ लोगों को छूट क्यों दी जा रही है?
- महिला श्रद्धालुओं के साथ बदसलूकी के वक्त महिला पुलिसकर्मी वहां क्यों मौजूद नहीं थीं?
- क्या रक्षक ही अब भक्षक बनकर श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुँचाएंगे?
मौजूदा स्थिति
फिलहाल, एसडीपीओ चंदन कुमार वत्स इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं। मंदिर परिसर में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है और दर्शन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग तेज हो गई है।




