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मोतिहारी में ‘लव एग्रीमेंट’ की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा: डॉक्टर ने शादी का झांसा देकर 5 साल किया युवती का शोषण; अब ₹10 लाख दहेज की मांग |

On: Saturday, January 31, 2026 1:57 PM
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मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) | विशेष ब्यूरो | 30 जनवरी, 2026
पूर्वी चंपारण (बिहार): जिले के हरसिद्धि थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सामाजिक और नैतिक मर्यादाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक शिक्षित पेशेवर (चिकित्सक) द्वारा कानूनी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक युवती को ‘लव एग्रीमेंट’ के फर्जी जाल में फंसाने और पांच वर्षों तक उसका शोषण करने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह घटना न केवल पेशेवर नैतिकता पर कलंक है, बल्कि कानून की आंखों में धूल झोंकने का एक गंभीर प्रयास भी है।
घटना का विवरण: विश्वासघात की पटकथा
जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी डॉक्टर नीरज कुमार (निजी क्लीनिक संचालक) ने लगभग 5 वर्ष पूर्व एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया। पीड़िता को विश्वास में लेने के लिए आरोपी ने मंदिर में विवाह किया और फिर उसे वैधानिक सुरक्षा का झांसा देने हेतु ₹100 के स्टाम्प पेपर पर एक ‘लव एग्रीमेंट’ तैयार करवाया। इस कथित समझौते में डॉक्टर ने बाकायदा ‘8 कसमें’ और शर्तें लिखी थीं, जिसे पीड़िता ने अपनी अज्ञानतावश वास्तविक कानूनी विवाह मान लिया।
पीड़िता का आरोप है कि वह पांच साल तक पत्नी बनकर आरोपी के साथ रही। किंतु, जब रिश्ते को सामाजिक और कानूनी पहचान दिलाने की बारी आई, तो डॉक्टर और उसके परिजनों ने ₹10 लाख नकद और एक लग्जरी गाड़ी (दहेज) की मांग शुरू कर दी। मांग पूरी न होने पर पीड़िता को प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया गया।
विधिक विश्लेषण: ‘लव एग्रीमेंट’ की कानूनी हैसियत शून्य
‘खबरदीप जनमंच’ की विशेष पड़ताल के अनुसार, भारतीय कानून में ‘लव एग्रीमेंट’ जैसा कोई शब्द अस्तित्व में ही नहीं है।

  • शून्य मान्यता: हिंदू विवाह अधिनियम (1955) के अंतर्गत केवल धार्मिक रीति-रिवाजों या कोर्ट मैरिज के माध्यम से हुआ विवाह ही मान्य है। ₹100 का स्टाम्प पेपर विवाह का विकल्प नहीं हो सकता।
  • BNS की धारा 69: यह मामला अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत आता है, जो ‘शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने’ को गंभीर अपराध मानती है। इसमें 10 वर्ष तक के कठोर कारावास का प्रावधान है।
    पुलिस कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
    हरसिद्धि पुलिस ने पीड़िता की शिकायत और प्रस्तुत ‘लव एग्रीमेंट’ के साक्ष्य के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त सूचना के अनुसार, आरोपी डॉक्टर फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। स्टाम्प पेपर को मुख्य साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया गया है।
    विशेष जागरूकता कॉलम: ‘खबरदीप जनमंच’ की अपील
    झांसे में न आएं, कानून को समझें:
  • स्टाम्प पेपर विवाह नहीं है: कोई भी डॉक्टर, वकील या शिक्षित व्यक्ति यदि आपसे स्टाम्प पेपर पर शादी का वादा करता है, तो वह कानूनन अवैध है।
  • पंजीकरण अनिवार्य: विवाह की पूर्ण वैधता के लिए मैरिज रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण (Registration) अवश्य कराएं।
  • हस्ताक्षर से पहले सोचें: कोरे कागजों या कम मूल्य के स्टाम्प पेपर पर भावनात्मक दबाव में हस्ताक्षर न करें।
  • सहायता लें: किसी भी संदेह की स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) या महिला थाने से संपर्क करें।
    संपादन नोट: यह खबर समाज में विधिक साक्षरता की कमी और महिलाओं के विरुद्ध डिजिटल व कागजी धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करती है।

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