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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: पुणे, ठाणे, नागपुर और रत्नागिरी के मानसिक अस्पतालों में अब डॉक्टरों-नर्सों को मिलेगी बड़ी डिग्री; मरीजों को मिलेगा देश का सबसे बेहतरीन इलाज

On: Saturday, May 23, 2026 10:59 PM
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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के चार बड़े सरकारी मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों (पुणे के येरवडा, ठाणे, रत्नागिरी और नागपुर) को लेकर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला किया है। अब इन अस्पतालों को केवल इलाज तक सीमित न रखकर बड़े ‘शिक्षण संस्थानों’ (टीचिंग इंस्टिट्यूट) में बदला जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब इन अस्पतालों में दिमागी और मानसिक बीमारियों का इलाज तो होगा ही, साथ ही यहाँ मानसिक रोगों के बड़े डॉक्टर, नर्स और एक्सपर्ट्स भी तैयार किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह सिर्फ अस्पतालों का विस्तार नहीं है, बल्कि समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों तक मानसिक स्वास्थ्य की सबसे आधुनिक सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में एक बेहद मानवीय कदम है। इस फैसले से आने वाले समय में राज्य को मानसिक रोगों के क्षेत्र में बड़े डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ मिलेंगे।

इस फैसले की जरूरत क्यों पड़ी?

दरअसल, समाज में आज भी मानसिक या दिमागी बीमारियों को लेकर जागरूकता की कमी है। साथ ही, इन बीमारियों का इलाज करने वाले बड़े डॉक्टरों और विशेष नर्सों की देश में भारी कमी है।
पुणे (येरवडा), ठाणे, रत्नागिरी और नागपुर के इन चार सरकारी अस्पतालों में कुल मिलाकर करीब ५,७०० बेड (बिस्तर) की बड़ी सुविधा उपलब्ध है। यहाँ हर साल हजारों मरीजों का इलाज होता है। सरकार के पास यहाँ पहले से ही बड़ी जमीनें, इमारतें और स्टाफ मौजूद हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तय किया कि क्यों न इन अस्पतालों का इस्तेमाल नए डॉक्टर और एक्सपर्ट्स तैयार करने के लिए भी किया जाए। यह योजना केंद्र सरकार के ‘मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ से जोड़कर चलाई जा रही है।

अस्पतालों में शुरू हुए ये बड़े कोर्स (पढ़ाई)-*

सरकार ने इसके लिए बाकायदा जरूरी नियम बनाकर इन अस्पतालों में उच्च शिक्षा के नए कोर्स शुरू करने को मंजूरी दे दी है। अब यहाँ नीचे दिए गए चार बड़े कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं:
एम.डी. सायकियाट्री (M.D. Psychiatry): दिमागी और मानसिक बीमारियों के सबसे बड़े विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की पढ़ाई।
एम.फिल क्लिनिकल साइकोलॉजी: मन के विकारों को समझने और काउंसिलिंग करने वाले बड़े एक्सपर्ट्स की पढ़ाई।
एम.फिल सायकियाट्रिक सोशल वर्क: मरीजों को समाज और परिवार से दोबारा जोड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की पढ़ाई।
डिप्लोमा इन सायकियाट्रिक नर्सिंग: मानसिक रूप से बीमार मरीजों की खास देखरेख करने वाली नर्सों की पढ़ाई।
यह पढ़ाई ठाणे, पुणे (येरवडा) और नागपुर के अस्पतालों में शुरू कर दी गई है।

जमीनी स्तर पर काम शुरू: नागपुर और ठाणे-पुणे से निकले छात्र

यह योजना सिर्फ कागजों पर नहीं है, बल्कि जमीन पर उतर चुकी है:
नागपुर में डॉक्टरों की पढ़ाई: नागपुर के मानसिक अस्पताल में इंदिरा गांधी सरकारी मेडिकल कॉलेज के सहयोग से डॉक्टरों की पढ़ाई साल २०२२-२३ से ही चल रही है। यहाँ हर साल ४ छात्रों को एडमिशन मिलता है। अब तक १२ छात्र दाखिला ले चुके हैं और २ छात्र डॉक्टर बनकर निकल भी चुके हैं।
ठाणे और पुणे में नर्सों की ट्रेनिंग: मानसिक मरीजों की देखभाल के लिए विशेष नर्स तैयार करने का कोर्स भी २०२२-२३ से शुरू हो चुका है। दोनों जगहों पर हर साल २०-२० सीटों पर एडमिशन होता है। अब तक ठाणे से ५९ और पुणे से ६० नर्सें यह विशेष कोर्स पास कर चुकी हैं।

आम जनता और गरीब मरीजों को इससे क्या फायदा होगा?

इस बड़े बदलाव से आम लोगों को सीधे ४ बड़े फायदे होंगे:
१. बेहतरीन इलाज: जब इन अस्पतालों में पढ़ाई और रिसर्च होगी, तो यहाँ देश के सबसे काबिल प्रोफेसर और डॉक्टर आएंगे। इससे गरीब मरीजों को मुफ्त या बेहद कम खर्चे में सबसे आधुनिक और बेस्ट इलाज मिल सकेगा।
२. स्टाफ की कमी होगी दूर: अस्पतालों को अब बाहर से डॉक्टरों या नर्सों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि अस्पताल के अपने छात्र ही मरीजों की चौबीसों घंटे सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे।
३. नई खोज और दवाइयां: यहाँ दिमागी बीमारियों पर नए-नए शोध (रिसर्च) होंगे, जिससे पुरानी और जटिल बीमारियों का आसान इलाज ढूंढा जा सकेगा।
४. गांव-गांव तक पहुँचेगी मदद: यहाँ से पढ़कर निकलने वाले डॉक्टर और नर्स जब महाराष्ट्र के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जाएंगे, तो गाँव के गरीब वंचित लोगों को भी मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
केंद्र और राज्य सरकार के आपसी तालमेल से शुरू हुई यह पहल महाराष्ट्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नया जीवन देने वाली है। यह कदम आने वाले समय में मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के जीवन में सम्मान और स्वास्थ्य का एक नया सवेरा लेकर आएगा।

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