पालघर, महाराष्ट्र | 26 जून 2026
प्रशासन द्वारा बोईसर में नए ‘अपर तहसील कार्यालय’ के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस प्रक्रिया के तहत पालघर तहसील के मनोर और लालोंडे सर्कल के दर्जनों गाँवों को बोईसर से जोड़ने का प्रस्ताव है। हालाँकि, यह प्रशासनिक फेरबदल स्थानीय निवासियों के लिए राहत के बजाय एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है।
असुविधा का केंद्र बनी प्रस्तावित दूरी
इन गाँवों के हजारों निवासियों का तर्क है कि ‘प्रशासनिक सुगमता’ के नाम पर लिया जा रहा यह निर्णय जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। वर्तमान में ये गाँव पालघर तालुका मुख्यालय से भौगोलिक रूप से निकट हैं और परिवहन की सुदृढ़ व्यवस्था से जुड़े हैं। इसके विपरीत, बोईसर की बढ़ती दूरी और वहाँ जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन के साधनों का अभाव ग्रामीणों के लिए दैनिक जीवन में भारी कठिनाई पैदा करेगा।
नागरिकों में आक्रोश, ‘पालघर’ को ही प्राथमिकता
स्थानीय ग्राम पंचायतों और नागरिक संगठनों ने इस कदम को अव्यावहारिक बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि यह निर्णय लागू हुआ, तो उन्हें छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए भी अनावश्यक समय और धन व्यर्थ करना पड़ेगा।
आंदोलन की राह और महत्वपूर्ण समय-सीमा
इस अन्यायपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के खिलाफ अब नागरिक लामबंद हो गए हैं। प्रशासन ने इस प्रस्ताव पर आपत्तियाँ दर्ज करने के लिए 7 जुलाई 2026 तक का समय निर्धारित किया है।
इसी क्रम में:
- जन-आग्रह: प्रत्येक ग्राम पंचायत, स्थानीय संस्थाओं और जागरूक नागरिकों से आह्वान किया जाता है कि वे इस तर्कसंगत और जनहितैषी लड़ाई में अपनी आवाज बुलंद करें।
- लिखित आपत्ति का महत्व: आप अपनी आपत्ति आधिकारिक रूप से दर्ज कराएं और यह स्पष्ट करें कि भौगोलिक और व्यावहारिक दृष्टि से ‘पालघर तालुका’ ही इन गाँवों की प्रशासनिक जीवनरेखा है।
प्रभावित गाँवों की सूची:
मनोर, नेटाली, कोंढाण, दामखिंड, आंभाण, बांधण, सावरखंड, टाकवाल, कोसबाड, पोले, दुर्वेस, टेन, करलगाँव, एम्बूर-एरंबी, सावरे, साये, गोवाडे, धुकटण, बहाडोली, खामलोली, तामसई, पोचाडे, सातीवली, हालोली, कुडे, बोट, वेहलोली, मासवन, वाकडी, काटाले, खरशेत, लोवरे, वांदिवली, वसरोली, नांदगाँव तर्फे मनोर, आशेरी, जिल्हार, खुटल, आवंढाणी, वाडा, खडकोना और वेलगाँव।
एकजुटता ही समाधान है!
प्रशासन तक अपनी यह आवाज पहुँचाने का अब अंतिम मौका है। आइए, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं और इस प्रशासनिक बदलाव का विरोध कर पालघर के साथ ही अपनी प्रशासनिक संबद्धता बनाए रखने की मांग करें।






