
पालघर (मनोर):
पालघर जिले के मनोर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आंवढानी ग्राम पंचायत के चिल्हार गांव में लंबे समय से चला आ रहा जमीन विवाद अब एक खूनी मोड़ ले चुका है। जिस जमीन के सरकारी दस्तावेजों (सातबारा) में असली मालिक किशोर जयंतीलाल शाह और जयूर किशोर शाह हैं, उस पर अवैध कब्जे की जिद ने अपनों को ही जान का दुश्मन बना दिया है।
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विश्लेषण

ताजा हमला: जेसीबी कार्य के दौरान 10 हमलावरों का तांडव
घटना की पृष्ठभूमि यह है कि विवादित जमीन (गट क्रमांक 39/4) पर असली मालिकों द्वारा पिछले दो दिनों से जेसीबी (JCB) लगाकर सफाई और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा था। इसी कानूनी कार्य से बौखलाकर हमलावरों ने रविवार, 3 मई 2026 की शाम करीब 5:30 बजे संतोष गोविंद सांबरे पर जानलेवा हमला कर दिया। संतोष और उनके परिवार का सीधा आरोप है कि करीब 10 लोगों के झुंड ने उन्हें घेरकर उन पर हमला किया।
ताजा पुलिस रिपोर्ट (NCR) और धाराओं का विवरण
मनोर पुलिस ने इस घटना के बाद NCR No. 0268/2026 दर्ज की है। इसमें सुनील सगन सांबरे और सुभाष सगन सांबरे को नामजद किया गया है। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
धारा 115(2) BNS: स्वेच्छा से चोट पहुँचाना (Voluntarily causing hurt)।
धारा 352 BNS: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना।
धारा 351(2) BNS: आपराधिक धमकी (जान से मारने की धमकी) देना।
मनोर ग्रामीण अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट (E85) में पीड़ित के चेहरे और नाक पर आई चोटों को ‘Assault’ (हमला) की श्रेणी में रखा गया है। संतोष के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने केवल दो लोगों को नामजद किया है, जबकि हमलावरों की संख्या कहीं अधिक थी।
विवाद का पुराना इतिहास और ‘क्रॉस कंप्लेंट’ का मोड़
यह जमीन विवाद कोई नया नहीं है। इसी जमीन को लेकर इसके पूर्व में भी कई बार हिंसक झड़पें और विवाद होते रहे हैं, जिसमें पूर्व में भी कई लोगों पर मामले दर्ज किए जा चुके हैं। ताजा घटनाक्रम में यह भी बताया जा रहा है कि मामले को उलझाने और पुलिस जांच को भटकाने के लिए विपक्षी पक्ष की ओर से *’क्रॉस कंप्लेंट’* का सहारा लिया जा रहा है। अक्सर देखा गया है कि अपनी गलती छिपाने और पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए अपराधी पक्ष ऐसी शिकायतों का उपयोग करता है।
7/12 (सातबारा) का सच और प्रशासन की सुस्ती
जमीन के सरकारी कागजात (7/12) स्पष्ट रूप से शाह परिवार के मालिकाना हक की पुष्टि करते हैं। इसके बावजूद संबंधित सरकारी विभागों द्वारा बरती जा रही उदासीनता ने इस विवाद को और हवा दी है।
चिल्हार गांव में उपजा यह तनाव किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। मालिकाना जमीन पर शांतिपूर्ण कार्य के दौरान हुए इस हमले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और पीड़ित पक्ष की मांग है कि
तहसीलदार (पालघर), राजस्व विभाग, भूमि अभिलेख विभाग और वरिष्ठ पुलिस प्रशासन तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करें। जमीन का आधिकारिक सीमांकन (Measurement) सुनिश्चित कर असली मालिकों को सुरक्षा प्रदान की जाए और सभी हमलावरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि गांव में शांति और कानून का राज बना रहे।
विशेष रिपोर्ट: खबरदीप जनमंच
(सत्यता और निष्पक्षता ही हमारी पहचान)






