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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में ‘साहबगिरी’ और वीआईपी संस्कृति समाप्त, गृह मंत्रालय का बड़ा नीतिगत निर्णय

On: Friday, May 29, 2026 9:21 AM
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राष्ट्रीय समाचार (नई दिल्ली):

केंद्र सरकार ने देश के प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में बड़े सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के तहत, अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में लंबे समय से चली आ रही औपनिवेशिक काल की ‘साहबगिरी’, विशिष्ट प्रोटोकॉल और वीआईपी (VIP) संस्कृति को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इस नए विनियामक आदेश का सीधा असर देश के प्रमुख अर्धसैनिक बलों CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB के कामकाज पर पड़ेगा। नए नीतिगत बदलावों के तहत अब वरिष्ठ अधिकारियों के आवागमन के दौरान प्रदर्शित किए जाने वाले भारी-भरकम सुरक्षा काफिले (एस्कॉर्ट) और पारंपरिक ‘क्वार्टर गार्ड सलामी’ जैसी गैर-जरूरी औपचारिकताओं को सीमित अथवा पूरी तरह समाप्त करने का आदेश दिया गया है।

नीतिगत निर्णय और क्रियान्वयन का आधिकारिक रिकॉर्ड

गृह मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार, इस सुधार की पृष्ठभूमि पूरी तरह सुविचारित और तय मानकों पर आधारित है:
उच्च स्तरीय समीक्षा: केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस आधुनिकीकरण एवं कार्मिक प्रभाग (Personnel Division) द्वारा अर्धसैनिक बलों के महानिदेशकों (DGs) के साथ सुरक्षा प्रबंधन और मानव संसाधन के सही उपयोग (Optimal Utilization) को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की गई थी।
आदेश का निष्पादन: इस समीक्षा के उपरांत गृह मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारियों के हस्ताक्षर से एक आधिकारिक नीतिगत पत्र जारी किया गया। इस आदेश को “तत्काल प्रभाव” से पूरे देश में लागू करने का निर्देश दिया गया है, जिसका अर्थ है कि सभी संबंधित बल मुख्यालयों को इस पर अविलंब अमल करना अनिवार्य है।

नए नियम और मुख्य प्रशासनिक बदलाव

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस नीतिगत दस्तावेज के अनुसार, सुरक्षा बलों के भीतर मुख्य रूप से तीन बड़े बदलाव किए जा रहे हैं:

1. सुरक्षा खतरे (Threat Perception) के आधार पर ही मिलेगा एस्कॉर्ट

पूर्व की व्यवस्थाओं में वरिष्ठ रैंक के अधिकारियों के सामान्य आवागमन के दौरान भी उनके पद के प्रभाव को प्रदर्शित करने के लिए आगे-आगे एस्कॉर्ट और पायलट वाहनों का काफिला चलता था। नए नियमों के अंतर्गत स्पष्ट किया गया है कि किसी भी अधिकारी को केवल ‘स्टेटस सिंबल’ या पद के दिखावे के लिए अतिरिक्त सुरक्षा वाहन और जवान नहीं दिए जाएंगे। एस्कॉर्ट का निर्धारण केवल खुफिया इनपुट्स तथा वास्तविक सुरक्षा खतरे (Threat Perception) के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर ही किया जाएगा।

2. ‘क्वार्टर गार्ड सलामी’ की औपचारिकताएं बेहद सीमित

अधिकारियों के field दौरों या बेस कैंप के निरीक्षण के समय उनके औपचारिक स्वागत के लिए कई घंटे पूर्व से जवानों को ‘क्वार्टर गार्ड सलामी’ की तैयारियों में लगा दिया जाता था। प्रशासनिक सुधार के तहत इस लंबी और समय खपाने वाली औपचारिक प्रक्रिया को न्यूनतम या समाप्त करने का निर्देश है, ताकि बल की दैनिक कार्यक्षमता प्रभावित न हो।

3. मानव संसाधन (जवानों) के निजी उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध

अक्सर यह तथ्य संज्ञान में आता रहा है कि फील्ड ड्यूटी के लिए अनुबंधित जवानों को वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर अर्दली, सहायक या घरेलू कार्यों में संबद्ध (Attach) कर दिया जाता था। सरकार ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ किया है कि प्रत्येक जवान का चयन देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए हुआ है। अतः किसी भी जवान की तैनाती अधिकारियों के व्यक्तिगत या घरेलू कार्यों में नहीं की जा सकती।

इस दूरगामी प्रशासनिक सुधार के राष्ट्रीय लक्ष्य

सुरक्षा और प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, गृह मंत्रालय के इस कदम के पीछे तीन अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य हैं:

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति: देश के सुरक्षा तंत्र को भारतीयकरण की ओर ले जाने और ब्रिटिश दौर के ‘साहब बहादुर’ के नियमों को बदलने की दिशा में यह एक आवश्यक कदम है।

मैनपावर का राष्ट्रहित में नियोजन: वर्तमान में सीमाओं की संवेदनशीलता और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए हर एक जवान की उपयोगिता अग्रिम मोर्चों पर सर्वाधिक है। वीआईपी प्रोटोकॉल से मुक्त होने वाले हजारों जवानों को वास्तविक सुरक्षा दायित्वों में नियोजित किया जा सकेगा।

अधीनस्थ जवानों का मनोबल बढ़ाना: जब बलों के भीतर गैर-जरूरी दूरियां और वीआईपी संस्कृति समाप्त होती है, तो अग्रिम मोर्चों पर तैनात ग्राउंड लेवल के जवानों का आत्मसम्मान और सांगठनिक विश्वास सुदृढ़ होता है। इससे अधिकारियों और जवानों के मध्य एक स्वस्थ पेशेवर समन्वय स्थापित होगा।

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