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‘एल नीनो’ का साया: किसान भाई अभी बुवाई (पेरणी) करने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें!

On: Tuesday, June 16, 2026 11:02 PM
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किसानों के लिए बड़ी खबर!

पालघर:
इस साल के खरीफ सीजन (खेती के मौसम) पर ‘एल नीनो’ (El Nino) का बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका मौसम विभाग ने जताई है। इसके कारण हमारे पूरे राज्य में और खासकर कोंकण के तटीय इलाकों में बहुत कम बारिश हो सकती है या फिर बारिश आगे-पीछे (असमय) होने की स्थिति बन सकती है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पालघर जिले के जिला कृषि अधिकारी श्री नीलेश भागेश्वर जी ने सभी किसान भाइयों से एक बहुत जरूरी अपील की है। उन्होंने कहा है कि किसान भाई केवल मानसून से पहले होने वाली हल्की-फुल्की बारिश या शुरुआती तूफानी पानी को देखकर अपनी मुख्य फसलों (जैसे: धान, रागी/नागली और वरई) की बुवाई या धूल-बुवाई (धूळवाफ) करने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें।

आसान भाषा में समझें: क्या है यह ‘एल नीनो’ का खतरा?

‘एल नीनो’ समुद्र और मौसम में होने वाला एक ऐसा बदलाव है, जिसकी वजह से मानसून का पूरा संतुलन बिगड़ जाता है। इसे आप सीधे शब्दों में इस तरह समझ सकते हैं:

  • समुद्र का गर्म होना: जब समुद्र का पानी जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है, तो समुद्र के ऊपर बहने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।
  • बादलों का रास्ता रुकना: ये हवाएं ही हमारे देश में पानी वाले बादलों को खींचकर लाती हैं। जब हवाएं कमजोर होती हैं, तो वे भारत तक पर्याप्त बादल नहीं पहुंचा पातीं।
  • सीधा मतलब: इस साल बारिश का कोई भरोसा नहीं है।* बारिश समय पर नहीं आएगी, बहुत कम होगी या फिर किसी एक गांव में होगी और दूसरे गांव में सूखा रहेगा। जल्दबाजी करने से कैसे होगा दोगुना नुकसान?

अक्सर किसान भाई पहली फुहार पड़ते ही खेतों में बीज डाल देते हैं। लेकिन इस साल ऐसा करना भारी पड़ सकता है:

  1. बीज का खराब होना: अगर आपने शुरुआती मामूली बारिश देखकर बीज बो दिए और उसके बाद कई दिनों तक पानी नहीं गिरा, तो सारे बीज जमीन के अंदर ही सूखकर सड़ जाएंगे।
  2. दोबारा बुवाई: इसके बाद आपको मजबूरी में दोबारा बुवाई (दुबार पेरणी) करनी पड़ेगी।
  3. आर्थिक नुकसान: दोबारा बीज और खाद खरीदने में आपका खर्चा दोगुना हो जाएगा और मेहनत भी बेकार जाएगी। 💡 सुरक्षित खेती के लिए कृषि विभाग के ५ अचूक मंत्र

इस साल समझदारी से काम लेकर ही आप अपनी फसल और पैसा बचा सकते हैं। इसके लिए इन ५ बातों को गांठ बांध लें:

१. जमीन की नमी देखकर ही बोएं: बुवाई का फैसला तभी लें जब अच्छी और जोरदार बारिश हो जाए और खेत की मिट्टी में अंदर तक सही गीलापन (नमी) आ जाए।
२. एक साथ दो फसलें लगाएं (अंतर-फसल): पूरे खेत में केवल एक ही फसल लगाने के बजाय, दो अलग-अलग फसलें मिलाकर लगाएं (जैसे अनाज के साथ कोई दाल या तिलहन)। इससे अगर कम पानी के कारण एक फसल खराब भी हुई, तो दूसरी फसल से आपकी कमाई बची रहेगी।
३. दवा से बीज का उपचार (बीजप्रक्रिया) जरूर करें: बुवाई से पहले बीजों में सही फफूंदनाशक या जैविक दवाइयां मिलाकर उनका उपचार करें। इससे बीज खराब नहीं होते, उन्हें कीड़े नहीं लगते और उनके उगने की ताकत बनी रहती है।
४. कम समय वाली फसलें चुनें: इस साल बाजार से ऐसे बीजों का चुनाव करें जिनकी फसल कम दिनों में पककर तैयार हो जाती है और जो कम पानी या सूखे को झेल सकती हैं।
५. मौसम की खबरों पर ध्यान दें: अपनी मर्जी से कदम उठाने के बजाय सरकारी कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर रेडियो, अखबार या मोबाइल पर दी जाने वाली जानकारियों को सुनकर ही अपने खेत का काम आगे बढ़ाएं।

🎯 मुख्य सूत्र: इस साल मौसम का मिजाज बदला हुआ है। इसलिए बिना सोचे-समझे की गई जल्दबाजी से सिर्फ नुकसान होगा। सही समय का इंतजार करना और पूरी सावधानी से काम लेना ही इस साल आपको घाटे से बचाएगा और अच्छी पैदावार देगा।

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